वाराणसी में नगर निगम की खुली पोल: बिना 'रिश्वत' सीवर साफ करने से इनकार, गंदे पानी के बीच जीने को मजबूर जनता*

 वाराणसी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी से 'स्वच्छ भारत अभियान' को ठेंगा दिखाने वाली एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है।


कैंट थाना क्षेत्र के सरसौली वार्ड में सरकारी सिस्टम की लापरवाही और कर्मचारियों की मनमानी के कारण स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। यहां मकान नंबर S-25/250 के पास पिछले कई दिनों से सीवर के चैंबर (मेनहोल) उफन रहे हैं। सीवर का बदबूदार और गंदा पानी सड़कों पर फैला हुआ है, लेकिन नगर निगम और जलकल विभाग के कर्मचारी बिना 'सुविधा शुल्क' (घूस) के काम करने को तैयार नहीं हैं।

कर्मचारियों की खुली मनमानी: '₹400 दो, तभी साफ होगा चैंबर'

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि सीवर संकट से निजात पाने के लिए उन्होंने नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया था। शिकायत के बाद विभाग ने अविलंब सफाई का आश्वासन भी दिया, लेकिन जब धरातल पर कर्मचारी पहुंचे तो उन्होंने अपनी जेब भरने को प्राथमिकता दी।

पीड़ितों का आरोप है कि मौके पर पहुंचे सफाईकर्मियों ने प्रति चैंबर ₹400 की मांग रख दी। जब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और सरकारी काम के लिए पैसे न होने की बात कही, तो कर्मचारी अड़ गए। बातचीत के दौरान जब लोगों ने कुछ पैसे कम करने को कहा, तो सफाईकर्मी भड़क गए और बिना सीवर साफ किए ही मौके से नाराज होकर लौट गए।

अधिकारियों को फोन किया, तो भेजा 'वसूली' दस्ता!

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जब स्थानीय लोगों ने जलकल विभाग के कर्मचारी मनीष वर्मा (मो. 9151803279) से संपर्क किया, तो उन्होंने मामले को रफा-दफा करने के लिए स्थानीय सुपरवाइजर विकास (मो. 9305029522)को मौके पर भेजा। लेकिन स्थिति सुधरने की बजाय वैसी ही रही। सुपरवाइजर विकास अपने साथ दो कर्मचारियों को लेकर आया, लेकिन वे भी ₹400 प्रति चैंबर की मांग पर अड़े रहे। पैसे न मिलने पर वे भी काम बीच में छोड़कर चलते बने।

एक तरफ सरकार जनता के हित और 'स्वच्छ काशी' का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम और जलकल विभाग के कर्मचारी बिना घूस लिए उंगली तक हिलाने को तैयार नहीं हैं। यह सरकार की कथनी और करनी के फर्क को साफ दर्शाता है।  आक्रोशित स्थानीय निवासी

बीमारी का खतरा: नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग

बार-बार की शिकायतों और गुहार के बाद भी सीवर का गंदा पानी सड़क पर जस का तस भरा हुआ है। आलम यह है कि इस भीषण गर्मी में गंदे पानी से उठने वाली तीव्र बदबू के कारण आसपास के लोगों का सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। राहगीरों और स्थानीय यात्रियों को इस गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।

इलाके में अब संक्रामक और गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि इस गंदगी के कारण कोई भी नागरिक गंभीर रूप से बीमार होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जलकल विभाग, नगर निगम और संबंधित भ्रष्ट कर्मचारियों की होगी।

बड़ा सवाल: क्या भ्रष्ट तंत्र पर होगी कार्रवाई?

इस घटना ने वाराणसी नगर निगम के दावों की हवा निकाल दी है। अब देखना यह है कि इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद:

क्या इन घूसखोर कर्मचारियों और लापरवाह सुपरवाइजर के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है?

क्या आम जनता को इस नरकीय स्थिति से राहत मिलेगी, या फिर वीवीआईपी क्षेत्र की जनता यूं ही सिस्टम की घूसखोरी का शिकार होती रहेगी?


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