चंदौली में कार्रवाई से टूटा कथित रिकवरी नेटवर्क का मनोबल, वाराणसी में कब होगी बड़ी कार्रवाई?

 वाराणसी। चंदौली में कथित अवैध रिकवरी एजेंटों के खिलाफ हुई हालिया कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।


आम जनता इस कदम की सराहना कर रही है, वहीं वाहन स्वामियों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब पड़ोसी जिले में प्रशासन सक्रिय होकर कार्रवाई कर सकता है, तो वाराणसी में अब तक ऐसे मामलों पर व्यापक अभियान क्यों नहीं चलाया गया?

वाहन स्वामियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से ऐसे लोगों की शिकायतें सामने आती रही हैं जो स्वयं को फाइनेंस कंपनी का प्रतिनिधि या रिकवरी एजेंट बताकर वाहनों को रोकते हैं। कई मामलों में यह भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि संबंधित व्यक्तियों के पास न तो स्पष्ट पहचान पत्र होता है और न ही मौके पर वैध प्राधिकरण पत्र दिखाया जाता है।

सूत्रों के अनुसार, वाहन रिकवरी के नाम पर कार्य करने वाले कुछ समूह कथित तौर पर ठेकेदारी व्यवस्था के माध्यम से संचालित होते हैं। आरोप हैं कि कुछ ठेकेदार किसी एक फाइनेंस कंपनी से अनुबंध लेने के बाद कई जिलों में फैले नेटवर्क का संचालन करते हैं। ऐसे में यह प्रश्न और गंभीर हो जाता है कि आखिर इनकी निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी है?

जनता पूछ रही है कि यदि कोई व्यक्ति सड़क पर किसी वाहन को रोककर स्वयं को फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी बताता है, तो उसकी पहचान की पुष्टि कौन करेगा? क्या ऐसे सभी व्यक्तियों के पास वैध पहचान पत्र, अधिकृत पत्र और कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं? यदि नहीं, तो यह स्थिति आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऋण वसूली की प्रक्रिया कानून और नियामकीय दिशा-निर्देशों के दायरे में होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की वसूली या वाहन जब्ती पारदर्शी, वैधानिक और जवाबदेह प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए।

अब मांग उठ रही है कि वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से ऐसे मामलों की समीक्षा करें। साथ ही सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया जाए कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को रिकवरी एजेंट बताकर वाहन रोकता है तो उसकी पहचान और अधिकार की तत्काल जांच की जाए।

जनहित में अपील: यदि किसी वाहन स्वामी को कोई व्यक्ति फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी या रिकवरी एजेंट बताकर वाहन रोकने का प्रयास करता है, तो उसकी पहचान और प्राधिकरण पत्र की जांच अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल यूपी-112 या निकटतम थाने को सूचना दें।

चंदौली की कार्रवाई ने यह साबित किया है कि प्रशासन चाहे तो कथित अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। अब जनता की निगाहें वाराणसी पर हैं। सवाल सिर्फ इतना है—क्या यहां भी कानून का राज स्थापित करने के लिए वैसी ही निर्णायक कार्रवाई होगी, या फिर जनता के सवाल अनुत्तरित ही रह जाएंगे? "चंदौली में एक्शन, वाराणसी में सन्नाटा! आखिर किसका संरक्षण?" "रिकवरी के नाम पर सड़क पर कौन चला रहा है अपना कानून?""चंदौली जागा, वाराणसी कब जागेगा?" "जनता पूछ रही है: आखिर किसके दम पर सक्रिय हैं कथित रिकवरी एजेंट?"

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