बृहस्पतिवार भोर में आंधी-बारिश का कहर: महावीर चौराहे पर गिरा विशाल गुलमोहर, आवागमन ठप, लगा जाम

 बृहस्पतिवार भोर में आंधी-बारिश का कहर: महावीर चौराहे पर गिरा विशाल गुलमोहर, आवागमन ठप, लगा जाम  



 विक्की मध्यानी  

वाराणसी। बृहस्पतिवार अल सुबह भोर में आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की कलई खोल दी। तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में पेड़ धराशायी हो गए, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई। 


सबसे ज्यादा असर महावीर चौराहा स्थित कस्तूरबा बालिका इंटर कॉलेज, अर्दली बाजार के बाहर देखने को मिला, जहां परिसर के बाहर लगा विशाल *गुलमोहर का पेड़* भोर में ही जड़ से उखड़कर मुख्य सड़क पर आ गिरा। देखते ही देखते पूरी सड़क अवरुद्ध हो गई और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। 


*घंटों जूझती रही जनता:* सुबह स्कूल-कॉलेज, दफ्तर और अस्पताल जाने वाले लोग को जाम के जाम से झेलना पड़ा। दुपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ा, जिससे अन्य मार्गों पर भी दबाव बढ़ गया। पैदल राहगीर, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे गिरे हुए गुलमोहर की फैली डालियों और सड़क पर हुए जलभराव के बीच जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हुए। 


विद्यालय प्रशासन जुटा, पर नाकाफी: घटना की जानकारी मिलते ही कस्तूरबा बालिका इंटर कॉलेज प्रशासन ने अपने स्तर पर पेड़ हटाने का प्रयास शुरू कर दिया। कर्मचारियों को लकड़ी काटने और रास्ता साफ करने में लगाया गया। लेकिन संसाधनों के अभाव में विशाल गुलमोहर का पेड़ पूरी तरह नहीं हटाया जा सका। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि नगर निगम और वन विभाग को सूचना दे दी गई है, टीम के पहुंचने के बाद ही रास्ता पूरी तरह बहाल हो पाएगा। 


*नगर निगम की तैयारी पर सवाल:* हर साल बारिश से पहले नाला सफाई और पेड़ों की छंटाई के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन भोर में आई पहली तेज बारिश-आंधी में ही यह दावे हवा हो गए। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जर्जर और झुके हुए पेड़ों की समय रहते छंटाई नहीं की गई, जिसका खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। 


फिलहाल मौके पर पुलिस भी पहुंच गई है और यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। नगर निगम की टीम का इंतजार है। तब तक महावीर चौराहे से गुजरने वाले लोगों को जाम और अव्यवस्था की दोहरी मार झेलनी पड़ेगी। 


*स्थानीय लोगों की मांग:* क्षेत्रीय नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि मानसून को देखते हुए युद्धस्तर पर जर्जर पेड़ों की पहचान कर छंटाई कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई टीम 24 घंटे सक्रिय रखी जाए।

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