नई बनी सड़क दो माह में उखड़ी, विभागीय तालमेल पर बड़ा सवाल
पाइप लाइन के बाद मरम्मत गायब, कज्जाकपुरा–कोनिया मार्ग बदहालसकरी सड़क और गड्ढों ने बढ़ाया खतरा, रोज हो रहे छोटे हादसेस्कूली बच्चों की सुरक्षा पर संकट, जिम्मेदार विभाग मौनपहले निर्माण फिर खुदाई—सरकारी धन की बर्बादी पर उठे सवाल
✍️आदर्श श्रीवास्तव
वाराणसी।आदमपुर क्षेत्र के कज्जाकपुरा से कोनिया जाने वाले मुख्य मार्ग पर विकास कार्यों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस सड़क को महज दो महीने पहले बड़े जोर-शोर से बनाया गया था, आज वही सड़क बदहाली और अव्यवस्था की मिसाल बन चुकी है। जलकल विभाग द्वारा पानी की पाइप लाइन बिछाने के नाम पर इस नई सड़क को दोबारा खोद दिया गया और काम पूरा होने के बाद उसे ठीक से दुरुस्त करने की जहमत तक नहीं उठाई गई। नतीजा—सड़क जगह-जगह से उखड़ी हुई है, गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और आम जनमानस के लिए मुसीबत का कारण बन गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग पहले से ही काफी सकरा है, जिससे वाहनों का आवागमन मुश्किल रहता है। अब सड़क की खुदाई के बाद हालात और भी बिगड़ गए हैं। गड्ढों और उबड़-खाबड़ सतह के कारण आए दिन जाम की स्थिति बन रही है। खासकर सुबह और शाम के समय, जब स्कूल जाने वाले बच्चों और नौकरीपेशा लोगों की आवाजाही अधिक होती है, तब स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। स्कूली बच्चों के अभिभावक खासे चिंतित हैं, क्योंकि छोटे-छोटे बच्चे इसी मार्ग से होकर स्कूल जाते हैं और हर पल किसी दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
क्षेत्र के निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कई बाइक सवार सड़क की खराब स्थिति के कारण गिरकर चोटिल हो चुके हैं। रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है। गड्ढों का अंदाजा न लग पाने के कारण वाहन चालक अचानक संतुलन खो देते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
सबसे अहम सवाल यही उठता है कि जब जलकल विभाग को पाइप लाइन बिछानी ही थी, तो यह काम सड़क निर्माण से पहले क्यों नहीं किया गया? पहले सड़क बनाना और फिर उसे खोद देना सीधे तौर पर योजना और समन्वय की भारी कमी को उजागर करता है। यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि जनता के धैर्य और सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। कई लोगों का कहना है कि शिकायतें करने के बावजूद अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। अधिकारियों की उदासीनता से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। विकास कार्यों की योजना बनाते समय यदि संबंधित विभाग आपस में समन्वय नहीं करेंगे, तो इसी तरह जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। एक ओर सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इस तरह की लापरवाही उन दावों की पोल खोलती नजर आती है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करते हैं। क्या प्रशासन समय रहते जागेगा और सड़क को दुरुस्त कर आम जनता को राहत देगा, या फिर यह मार्ग यूं ही हादसों का गवाह बनता रहेगा? फिलहाल, कज्जाकपुरा से कोनिया जाने वाले इस मार्ग पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है, और लोग हर दिन इस जोखिम के साथ सफर करने को मजबूर हैं।
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| एडवोकेट परमेश्वर मौर्य “जनता की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है, संबंधित विभाग तुरंत सड़क की मरम्मत कराए। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम जनहित में आंदोलन करने को मजबूर होंगे।” |
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| प्रकाश मौर्या स्थानीय दुकानदार “सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है, आए दिन छोटे-मोटे एक्सीडेंट होते रहते हैं। स्कूली बच्चों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।” |
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