पड़ताल भाग-1: कैंट स्टेशन के मुहाने पर बसा 'पाप का बाज़ार

  VDA, पुलिस और पर्यटन विभाग की नाक के नीचे चल रहा परेड कोठी का काला साम्राज्य


वाराणसी। विश्व की सांस्कृतिक राजधानी काशी में कदम रखते ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का सामना अगर किसी पहली हकीकत से होता है, तो वह है कैंट रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित सिगरा थाना क्षेत्र का 'परेड कोठी' इलाका। जो क्षेत्र बनारस की सुगम मेहमाननवाज़ी का चेहरा होना चाहिए था, वह आज सफेदपोश रसूखदारों, भ्रष्ट तंत्र और दलालों के गठजोड़ के दम पर अनैतिकता, नशे के अड्डेबाजी और खुली ठगी का 'रेड-लाइट' सिंडिकेट बन चुका है।

सरकारी विभागों का अंधापन: जब फाइलें बिकीं और नियम दफ्न हुए

परेड कोठी की तंग गलियों में सिर उठाए सैकड़ों कंक्रीट के ढांचे किसी विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि नियमों की चिता पर खड़े किए गए अवैध अड्डे हैं। यहां भ्रष्टाचार की परतें साफ दिखती हैं:

VDA की 'मिलीभगत वाली चुप्पी':आवासीय नक्शों पर 4 से 5 मंजिला व्यावसायिक इमारतें तान दी गईं। न आग बुझाने के उपकरण, न निकास द्वार और न ही पार्किंग। वीडीए के जिम्मेदार इंजीनियरों की कथित ‘जेब-गर्म’ नीति के चलते इन जानलेवा इमारतों पर आज तक सीलिंग का हथौड़ा नहीं चला।

पर्यटन विभाग का 'रजिस्टर विहीन' खेल: 'अतिथि देवो भव:' का नारा देने वाला पर्यटन विभाग इस बात से पूरी तरह अनजान बना बैठा है कि इनमें से अधिकांश ठिकाने सराय एक्ट तक में दर्ज नहीं हैं। बिना किसी वैध लाइसेंस के इन कमरों को घंटों के हिसाब से किन असामाजिक तत्वों को सौंपा जा रहा है, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं।

नगर निगम और सिगरा पुलिस की साठगांठ: स्टेशन से निकलते ही यात्रियों को नोचने वाले अवैध वेंडरों और ठेलों की फौज नगर निगम की नाकामी का सुबूत है। वहीं, सिगरा पुलिस की 'औचक जांच' केवल कागजी खानापूर्ति और कोरम पूरा करने तक सीमित है। बिना आईडी एंट्री, रजिस्टर में फर्जी नाम और गलियों में दलालों की खुली सौदेबाजी पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा रही है।

काशी की अस्मिता पर दाग, टूटेगी चुप्पी?

यह केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि काशी की पवित्र छवि और यहां आने वाली मां-बहनों व परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा सीधा मुद्दा है। क्या शासन-प्रशासन किसी बड़े आपराधिक कांड या अग्निकांड का इंतज़ार कर रहा है, या फिर इस संगठित सिंडिकेट पर बुलडोजर और कानूनी कार्रवाई का डंडा चलेगा?

खुलासा अभी बाकी है...

कागजी दावों और झूठी हिदायतों के पीछे किन-किन होटलों के तहखानों में अनैतिक कारोबार के कमरे सजते हैं? कौन से रसूखदार इन अवैध ढांचों को अपनी छत्रछाया दे रहे हैं?

अगले अंक में देखिए: परेड कोठी के उन बदनाम होटलों और गेस्ट हाउसों की पूरी सूची, उनके असली चेहरे और मौके की तस्वीरों के साथ सबसे बड़ा जमीनी पर्दाफाश।

बने रहिए हमारे साथ... मिलते हैं अगले अंक में!

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