वाराणसी|सूबे में भू-माफियाओं के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने ही संसदीय क्षेत्र में सवालों के घेरे में है।
मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के शिवदासपुर से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है,
जहां एक लाचार विधवा महिला की पुश्तैनी जमीन पर अपनों ने ही कब्जा करने की नीयत से खूनी खेल शुरू कर दिया है। पति की मौत के बाद तीन नाबालिग बेटियों और 5 साल के मासूम बेटे की परवरिश कर रही पीड़िता ने दबंगों पर मारपीट, तोड़फोड़ और जान से मारने की धमकी का आरोप लगाते हुए कमिश्नरेट पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।
बंटवारे में मिली थी 1040 वर्गफीट जमीन
पीड़िता चन्द्रावती देवी (पत्नी स्व. छविनाथ पटेल) के अनुसार, ससुर बुधीराम पटेल की पुश्तैनी संपत्ति के आपसी बंटवारे में उन्हें आराजी नंबर 210 में लगभग 1040 वर्गफीट जमीन मिली थी। जमीन की बकायदा बाउंड्रीवाल कराकर गेट भी लगाया गया था। वर्ष 2023 में पति के निधन के बाद पीड़िता अकेले अपने बच्चों का पेट पाल रही है। महिला का आरोप है कि बेसहारा देखकर उनके सगे भतीजे अनिल पटेल, उसकी पत्नी सोना खान, अनीता पटेल और सोनू सहित कई अन्य लोग जमीन हड़पने की फिराक में जुट गए।
गेट का ताला तोड़ा, बाउंड्री गिराई और बेटियों संग की अभद्रता
पीड़िता ने बताया कि 4 सितंबर को विपक्षी पूरी योजना के साथ लाठी-डंडों से लैस होकर पहुंचे। उन्होंने जमीन की बाउंड्रीवाल तोड़ दी और मुख्य गेट का ताला तोड़ने लगे। जब चन्द्रावती देवी ने विरोध किया, तो दबंगों ने उन्हें जमीन पर गिराकर बेरहमी से पीटा। बीच-बचाव करने पहुंचीं मासूम बेटियों के साथ भी खुलेआम अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई। चीख-पुकार सुनकर जब आसपास के लोग जुटे और डायल 112 पर कॉल की गई, तब जाकर आरोपी धमकी देते हुए फरार हुए।
थाने के चक्कर काट रही पीड़िता, जांच के नाम पर सिर्फ आश्वासन
पीड़िता का दर्द यह है कि 5 सितंबर को मंडुवाडीह थाने में नामजद तहरीर देने के बावजूद न तो पुलिस ने उनका मेडिकल कराया और न ही दबंगों पर कोई सख्त कानूनी शिकंजा कसा। थक-हारकर महिला ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) और वाराणसी कमिश्नरेट के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़िता की खुली चुनौती:
प्रशासन राजस्व विभाग से निष्पक्ष जांच करा ले। अगर कागजातों में जमीन पर मेरा हक नहीं है, तो जमीन उन्हें सौंप दी जाए। लेकिन यदि दस्तावेज मेरे पक्ष में हैं, तो अनाथ बच्चों के सिर से छत छीनने वाले इन भू-माफियाओं को सलाखों के पीछे भेजा जाए।"
चार मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर सहमी विधवा महिला अब इंसाफ की आस में अधिकारियों की चौखट पर टकटकी लगाए बैठी है। सवाल यह उठता है कि क्या वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट इस बेसहारा परिवार को समय रहते सुरक्षा और न्याय दिला पाएगा, या फिर फाइलों की धूल में एक और विधवा की चीख दबकर रह जाएगी।
