विक्की मध्यानी
सड़क विवाद में जानलेवा हमला,आरोपी दे रहे खुलेआम धमकी, गिरफ्तारी अब तक नहीं
वाराणसी। लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र के नई बस्ती में 31 जुलाई की रात सड़क पर खड़े वाहनों को हटाने की एक छोटी सी बात ने एक पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। दबंगों ने कार से खींचकर युवक को ईंट-पत्थरों से लहूलुहान कर दिया। पत्नी बीच-बचाव में आई तो उसे भी पीटा गया और गालियां दी गईं। कार में बैठी 3 साल की मासूम बेटी चीख-चीख कर रोती रही।
नई बस्ती निवासी कल्पना राय पत्नी अनुराग रायने बताया कि रात करीब 8:15 बजे वह पति के साथ कार से घर लौट रही थीं। घर से करीब 100 मीटर पहले सड़क पर कार और कई बाइकें बेतरतीब खड़ी थीं। हटाने का अनुरोध करने पर करन सोनकर, भीम गुप्ता, बाबू, अर्जुन सहित आधा दर्जन लोग भड़क उठे
आरोप है कि आरोपितों ने अनुराग को कार से घसीट कर जमीन पर पटक दिया और सिर पर ईंट-पत्थरों से ताबड़तोड़ वार किए। कुछ ही देर में अनुराग खून से लथपथ हो गए। कल्पना ने पति को बचाने की कोशिश की तो आरोपितों ने उनके साथ भी मारपीट की और कार के शीशे तोड़ दिए।
सबसे दर्दनाक मंजर तब हुआ जब कार में बैठी 3 साल की बेटी लगातार चिल्ला रही थी - _"पापा को सब लोग मार रहे हैं"_। अपने लहूलुहान बेटे को जमीन पर गिरा देखकर घर की बुजुर्ग मां वहीं बेहोश होकर गिर पड़ीं।
आन-फानन में घायल अनुराग को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें BHU ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। अब अनुराग घर आ गए हैं और उनका इलाज अभी भी चल रहा है।
इस मामले में लालपुर-पांडेयपुर थाने में मुकदमा संख्या 0226/2026 दर्ज है। लेकिन घटना के 15 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है।
खाकी वर्दी पहनने वाली मां भी न्याय के लिए दर-दर
पीड़ित परिवार की पीड़ा सबसे ज्यादा इसी बात से बढ़ जाती है कि घायल अनुराग के पिता अरुण सिंह पेशे से पत्रकार हैं और उनकी मां खुद महिला पुलिस कर्मचारी हैं। पत्नी कल्पना राय गृहणी हैं। कानून को नजदीक से समझने और व्यवस्था का हिस्सा होने के बावजूद आज यह परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है।
6 अगस्त को कल्पना राय ने पुलिस आयुक्त को पत्र देकर गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विवेचक श्री धर्मेंद्र वर्मा जांच में लापरवाही कर रहे हैं। घटनास्थल के साक्ष्य नहीं जुटाए गए। आरोपित आज भी अस्पताल आकर रेकी कर रहे हैं और खुलेआम धमकी दे रहे हैं - _"मुकदमा वापस लो वरना जान से मार देंगे"_।
परिवार ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। मोहल्ले के लोग भी पूछ रहे हैं कि जब एक पत्रकार और एक पुलिसकर्मी का परिवार इस तरह दहशत में है तो आम जनता का क्या होगा।

