गंगा का विकराल रूप, वाराणसी में बदली घाटों की तस्वीर

 आरती स्थल बदला, बाहरी नावों पर रोक; बढ़ते जलस्तर से नाविकों और पुरोहितों की मुश्किलें बढ़ीं


वाराणसी। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के बीच वाराणसी में गंगा ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर का असर काशी के घाटों से लेकर नाव संचालन और धार्मिक आयोजनों तक साफ दिखाई देने लगा है। बीते 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में करीब तीन फीट तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक वाराणसी में गंगा का जलस्तर 63 मीटर के पार पहुंच गया है।





जलस्तर बढ़ने के साथ ही प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के दौरान बाहरी नावों को लगाने पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में प्रशासन ने नाविकों के साथ बैठक कर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।


प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को नाव पर बैठाकर नौकायन न कराया जाए। इसके साथ ही नाव की निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर भी रोक लगाई गई है। नाविकों को सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करने की हिदायत दी गई है। नाविक शंभु निषाद ने कहा कि प्रशासन की ओर से जो भी निर्देश दिए गए हैं, सभी नाविक उनका पालन करेंगे।


घाटों का संपर्क मार्ग डूबा

गंगा के उफान का असर अब घाटों के संपर्क मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है। शनिवार सुबह तुलसी घाट से पम्पवा घाट की ओर जाने वाले प्लेटफॉर्म पर भी पानी पहुंच गया, जिसके चलते कई घाटों के बीच संपर्क मार्ग बाधित हो गया है। वहीं दशाश्वमेध घाट से अहिल्याबाई घाट समेत अन्य घाटों की ओर जाने वाले संपर्क मार्ग भी गंगा के पानी में डूब चुके हैं।

बदला गंगा आरती का स्थान

बढ़ते जलस्तर के कारण अस्सी घाट के बाद अब दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती का स्थान भी बदल दिया गया है। दोनों घाटों पर निर्धारित आरती स्थल से करीब 10 फीट ऊपर आरती का आयोजन किया जा रहा है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो वाराणसी में नाव संचालन पर पूरी तरह रोक लगाए जाने की स्थिति भी बन सकती है।


पुरोहित और नाविकों के सामने बढ़ा संकट

अस्सी घाट के पुजारी बलिराम मिश्र ने बताया कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से घाट किनारे रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते पानी के कारण नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।


गंगा का जलस्तर अगर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में नाविकों, पुरोहितों और घाट किनारे रहने वाले लोगों के सामने और बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


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