प्रतियोगिता के दूसरे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ पं.
ओंकारनाथ ठाकुर ऑडिटोरियम में वाद्य संगीत-एकल (मेलोडिक) प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों के माध्यम से अपनी संगीत प्रतिभा एवं साधना का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इसके उपरांत वाद्य संगीत-एकल (पर्कशन) प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने ताल, लय एवं वादन-कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। समूह वादन में विद्यार्थियों ने आपसी तालमेल, सामूहिक अनुशासन एवं संगीतात्मक समन्वय का सुंदर परिचय दिया।
वाद्य संगीत प्रतियोगिताओं के साथ-साथ थिएटर एवं पारंपरिक कहानी-वाचन से संबंधित प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति एवं मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास एवं सामूहिक प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
इसी दिन दृश्य कला एवं कलात्मक अभिव्यक्ति से संबंधित प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कलाकृतियों/प्रोजेक्ट का प्रदर्शन (Display of Artefacts/Project) किया गया, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विभिन्न कलात्मक एवं रचनात्मक वस्तुओं तथा परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। इन प्रदर्शनों में विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, स्थानीय एवं स्वदेशी कला के प्रति रुचि तथा रचनात्मक सोच का परिचय मिला। कलाकृतियों के मूल्यांकन हेतु निर्णायकों द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर प्रतिभागियों के कार्यों का अवलोकन एवं मूल्यांकन किया गया।
इसके पश्चात् दृश्य कला-एकल (2-D) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने द्विआयामी कला के माध्यम से अपनी कल्पना, कलात्मक दृष्टि एवं अभिव्यक्ति को प्रस्तुत किया। इसके बाद दृश्य कला-एकल (3-D/स्कल्पचर) प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने त्रिआयामी कलाकृतियों एवं मूर्तिशिल्प के माध्यम से अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रचनाओं में उनकी कल्पनाशीलता, सूक्ष्म कलात्मक दृष्टि एवं सृजनात्मक कौशल देखने को मिला।
इसके क्रम में दृश्य कला-समूह (2-D/3-D) - Indigenous Toys & Game/Local Craft प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने भारतीय एवं स्थानीय कला-परंपराओं, स्वदेशी खिलौनों, पारंपरिक खेलों तथा स्थानीय शिल्प की अवधारणाओं को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस प्रतियोगिता ने विशेष रूप से भारतीय लोक एवं स्थानीय कला-विरासत के संरक्षण तथा विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री ए. के. सिंह, प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय का. हि.वि.वि. परिसर, वाराणसी, आयोजन समिति के सदस्यों, शिक्षकों, अनुरक्षकों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतियोगिता का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ ।
