अदालत का बड़ा फैसला: एडवोकेट ऋषभ कुमार सिंह की धारदार पैरोकारी से संदीप कुमार पाण्डेय को मिली अग्रिम जमानत

22 महीने की देरी से दर्ज एफआईआर, चिकित्सीय साक्ष्य के अभाव और हाई कोर्ट की विधि व्यवस्था को एडवोकेट ऋषभ कुमार सिंह ने बनाया मजबूत आधार
अधिवक्ता ऋषभ कुमार सिंह
वाराणसी। जनपद न्यायालय वाराणसी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्रुतगामी प्रथम) कुलदीप सिंह-II की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या 2389/2026 पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त संदीप कुमार पाण्डेय को अग्रिम जमानत प्रदान की है। इस पेचीदा और गंभीर मामले में अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता ऋषभ कुमार सिंह की दूरदर्शी रणनीति, सटीक कानूनी तर्कों और प्रभावी पैरोकारी के चलते अदालत ने 1 लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के जमानती पर जमानत याचिका स्वीकार कर ली।


यह मामला महिला थाना, वाराणसी से संबंधित मु०अ०सं० 63/2017 (धारा 498A, 376D, 328, 323, 504, 506 IPC व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम) से जुड़ा था, जिसमें वादिनी (पत्नी) द्वारा अभियुक्त व उसके परिवार पर दहेज उत्पीड़न, जहरीला पदार्थ पिलाने और सामूहिक बलात्कार जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए गए थे।

एडवोकेट ऋषभ कुमार सिंह द्वारा कोर्ट के समक्ष रखे गए प्रमुख बिंदु:

  1. एफआईआर में 22 महीने का विलंब: अधिवक्ता ऋषभ कुमार सिंह ने अदालत के समक्ष तथ्यात्मक रूप से स्पष्ट किया कि कथित घटना 14 जुलाई 2015 की है, जबकि एफआईआर लगभग 22 महीने बाद 3 मई 2017 को दर्ज कराई गई, जिसका अभियोजन पक्ष के पास कोई स्पष्टीकरण नहीं था।

  2. चिकित्सकीय बयान में विरोधाभास: निजी चिकित्सक (डॉ. जी.एन. गुप्ता) के धारा 161 दं.प्र.सं. के बयानों को प्रमुखता से रखते हुए उन्होंने दर्शाया कि डॉक्टर के अनुसार पीड़िता को केवल उल्टी की दवा दी गई थी और बलात्कार से संबंधित कोई साक्ष्य या विवरण डॉक्टर के सामने नहीं आया था।

  3. उच्च न्यायालय के आदेश एवं विधि व्यवस्था: एडवोकेट ऋषभ कुमार सिंह ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दी गई अंतरिम राहतों और 'श्रीमती बच्ची देवी बनाम उ.प्र. राज्य' मामले में पारित महत्वपूर्ण नजीर का संदर्भ देकर साबित किया कि अभियुक्त ने अन्वेषण (जांच) के दौरान पुलिस का पूरा सहयोग किया है और वह कभी न्यायिक अभिरक्षा में नहीं रहा।

न्यायालय का रुख:

अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने तथा पत्रावली का अनुशीलन करने के पश्चात पाया कि अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसने विवेचना में पूरा सहयोग किया है। माननीय न्यायाधीश ने गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना शर्तों के अधीन अग्रिम जमानत स्वीकार कर ली।

법 परिसर और वकीलों के हलकों में एडवोकेट ऋषभ कुमार सिंह की इस बेहतरीन कानूनी समझ, साक्ष्यों के विश्लेषण और सटीक केस लॉ के उपयोग की काफी सराहना की जा रही है।

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