पूर्वांचल में फाइनेंस कंपनियों की रिकवरी प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।
चंदौली के पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल द्वारा रिकवरी एजेंटों को कानून के दायरे में रहकर कार्य करने की सख्त चेतावनी दिए जाने के बाद वाराणसी सहित आसपास के जिलों में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
हाल ही में सामने आए एक वीडियो में एसपी आकाश पटेल यह स्पष्ट करते दिखाई दे रहे हैं कि ऋण वसूली या वाहन जब्ती की कार्रवाई केवल वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है। किसी भी एजेंट को कानून हाथ में लेने, धमकी देने, अभद्र व्यवहार करने या बलपूर्वक वाहन कब्जे में लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
वाराणसी के राजघाट, कज्जाकपुरा, चौकाघाट, सारनाथ, पड़ाव, रिंग रोड, दानूपुर और चौबेपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों से समय-समय पर वाहन जब्ती और रिकवरी को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ वाहन स्वामियों का आरोप है कि बकाया किस्तों की वसूली के नाम पर दबाव बनाया जाता है और कई बार नियमों की अनदेखी की जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही संभव है।
वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और न्यायालयों द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार रिकवरी एजेंटों को मर्यादित और कानूनी तरीके से कार्य करना अनिवार्य है। किसी भी व्यक्ति को डराना, धमकाना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या बलपूर्वक संपत्ति कब्जे में लेना नियमों के विपरीत माना जाता है। वाहन जब्ती की स्थिति में एजेंट के पास अधिकृत पहचान पत्र, प्राधिकरण पत्र और आवश्यक दस्तावेज होना जरूरी है।
चंदौली पुलिस की इस पहल के बाद अब लोगों की निगाहें वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट पर भी हैं। नागरिकों का मानना है कि यदि कहीं भी नियम विरुद्ध वसूली, दबंगई या अवैध वाहन जब्ती की शिकायतें मिलती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही रिकवरी एजेंटों की वैधता, प्रशिक्षण और अधिकृत दस्तावेजों का समय-समय पर सत्यापन भी कराया जाना चाहिए।
वाराणसी पुलिस की ओर से जनता के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
यदि कोई व्यक्ति स्वयं को रिकवरी एजेंट बताकर वाहन रोकता है या जब्त करने का प्रयास करता है, तो सबसे पहले उसका पहचान पत्र और अधिकृत प्राधिकरण पत्र देखने का अनुरोध करें। किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव, अभद्रता या विवाद की स्थिति में तत्काल डायल-112 पर सूचना दें अथवा निकटतम थाने से संपर्क करें।
पुलिस यह भी सलाह देती है कि विवाद की स्थिति में कानून अपने हाथ में न लें। यदि संभव हो तो घटनास्थल, संबंधित व्यक्तियों और वाहन की फोटो या वीडियो सुरक्षित रखें, जिससे जांच के दौरान साक्ष्य उपलब्ध कराए जा सकें। साथ ही वाहन ऋण से संबंधित सभी दस्तावेज, भुगतान रसीदें और बैंक से प्राप्त पत्राचार सुरक्षित रखें।
चंदौली एसपी की चेतावनी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या पूर्वांचल में रिकवरी और वाहन जब्ती की प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और कानूनसम्मत बनाने के लिए व्यापक स्तर पर निगरानी और कार्रवाई देखने को मिलेगी। आने वाले समय में प्रशासन की कार्यवाही इस सवाल का जवाब दे सकती है।
