अग्निशमन विभाग की लापरवाही भयानक हादसे का दे रहा न्योता
दिल्ली-बिहार के अग्निकांडों से सबक नहीं ले रहा अग्निशमन विभाग
घनी आबादी वाले इलाकों में नियमों के विपरीत संचालित हो रहे होटल, अस्पताल और रेस्टोरेंट
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| अनिल मौर्या |
वाराणसी। दिल्ली और बिहार में हुए भीषण अग्निकांडों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अग्निशमन नियमों की अनदेखी कितनी भयावह साबित हो सकती है। इन घटनाओं में कई लोगों की जान गई और करोड़ों रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई। इसके बावजूद वाराणसी में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शहर के अनेक घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिना पर्याप्त अग्निशमन मानकों के होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, स्कूल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित किए जा रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि जिन संस्थानों में अग्निशमन सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तक नहीं हैं, वह भी बेखौफ होकर कारोबार कर रहे हैं। कई स्थानों पर संकरे रास्ते, आपातकालीन निकास की कमी, अग्निशमन उपकरणों का अभाव और सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी देखने को मिलती है। इसके बावजूद संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, अग्निशमन विभाग की कथित मिलीभगत के कारण नियमों का उल्लंघन करने वाले कई प्रतिष्ठान निर्बाध रूप से संचालित हो रहे हैं। चर्चा है कि कुछ होटल, अस्पताल, रेस्टोरेंट और स्कूल संचालक विभागीय अधिकारियों की जेब गर्म कर नियमों की अनदेखी के बावजूद संचालन की छूट प्राप्त कर लेते हैं। इतना ही नहीं, यह भी आरोप है कि नियमों के विरुद्ध चल रहे कई प्रतिष्ठानों से कथित तौर पर मंथली नजराना लिया जाता है, जिसके चलते जांच और कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।
अचूक रणनीति समाचार ने पूर्व में भी अपनी खबरों के माध्यम से इस गंभीर विषय की ओर प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया था। कई बार यह सवाल उठाया गया कि आखिर ऐसे प्रतिष्ठानों को संचालन की अनुमति कैसे मिल रही है, जहां किसी भी आपात स्थिति में लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। हालांकि इन प्रयासों का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया और हालात जस के तस बने हुए हैं।
शहर के चौक, मैदागिन, लहुराबीर, चेतगंज, भेलूपुर सिगरा लंका और अन्य घने आबादी वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठान संचालित होने की चर्चा है, जहां अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन संदिग्ध है। यदि किसी भवन में आग लगने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाए तो संकरी गलियों और भीड़भाड़ के कारण राहत एवं बचाव कार्य भी प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते व्यापक जांच और कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो वाराणसी में भी किसी बड़े अग्निकांड की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन और अग्निशमन विभाग को चाहिए कि वह कागजी खानापूरी से आगे बढ़कर वास्तविक निरीक्षण कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, ताकि किसी संभावित त्रासदी को रोका जा सके।
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