आस्था का दीप बुझा: संत साईं साधराम साहिब ब्रह्मलीन, पांडेयपुर में हुई पावन स्मृति सभा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जताया शोक, कहा — "सेवा और करुणा की मिसाल थे साईं जी" 

विक्की मध्यानी

 वाराणासी।।पाकिस्तान के सिंध प्रांत स्थित राहरकी साहिब के सर्वोच्च धर्मगुरु संत साईं साधराम साहिब मंगलवार 19 मई 2026 तड़के ब्रह्मलीन हो गए। 62 वर्षीय संत के निधन से विश्व भर के सिंधी समाज में शोक की लहर है। 


25 अक्टूबर 1963 को राहरकी साहिब में जन्मे साईं जी ने किशोरावस्था में ही सेवा का मार्ग चुना। दुखियों के मरहम कहे जाने वाले संत लगभग हर वर्ष पुत्र रोहत लाल संग भारत यात्रा पर आते थे। 

उनके ब्रह्मलीन होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, "उनके स्नेह, सेवा, करुणा एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन ने असंख्य श्रद्धालुओं का जीवन आलोकित किया। उनका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।" 

पावन स्मृति सभा: शनिवार, 23 मई 2026 को वाराणसी के पांन्डेपुर स्थित सिंधी कॉलोनी के S.S.D. धाम में पगड़ी रस्म एवं श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। शाम 6 बजे हुई इस सभा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर संत को पुष्प अर्पित किए और उनके आशीर्वचनों को याद किया। S.S.D मंडल द्वारा आयोजित सभा में कहा गया — "संत कभी विदा नहीं होते, वो ज्योति बनकर रहमतों के साथ हमारे बीच जगमगाते रहते हैं।"

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