सुबह कलश यात्रा, दोपहर 7 जोड़ों ने आहुति संग किया हवन साईं मोहनलाल साहिब के सानिध्य होगा शिखर पूजन |रात महाआरती व भंडारा
विक्की मध्यानी
वाराणसी। काशी की धरती पर शुक्रवार 1 मई 2026 की वैशाख पूर्णिमा के दिन पांडेपुर सिंधी कॉलोनी आस्था और उल्लास से सरोबोर हो उठी। सिंधी कॉलोनी में आजादी के दौर में स्थापित झूलेलाल मंदिर का जीर्णोद्धार कर उसे दो मंजिला भव्य स्वरूप दिया गया। यह मंदिर सिंधी समाज की एकता और आस्था के प्रतीक होने के साथ समाज सेवा का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। सुबह 7 बजे 51 महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर जब भव्य कलश यात्रा निकाली तो पूरा पांडेयपुर "जय झूलेलाल" के जयकारों से गूंज उठा। सिंधी भजनों की मधुर धुन और महिलाओं की परंपरागत वेशभूषा ने कलश यात्रा को अलौकिक बना दिया। इसी कलश के पवित्र जल से विग्रहों का जलाभिषेक कर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का दिव्य आगाज हुआ।
सुबह से शाम तक गूंजे वैदिक मंत्र:
कलश यात्रा सिंधी कॉलोनी से प्रारंभ होकर काली जी मंदिर, पांडेयपुर में दर्शन कर झूलेलाल मंदिर लौटी। इसके साथ ही वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन का दौर शुरू हो गया। दोपहर में 7 यजमान जोड़ों ने पूरे विधि-विधान से हवन-पूजन व आरती की। जलाधिवास, अन्नाधिवास, नेत्रोन्मीलन, स्नान अनुष्ठान व शिखर पूजन जैसे दुर्लभ अनुष्ठान संपन्न कराए गए। दोपहर 3 बजे रुद्राभिषेक और 4 बजे महाआरती के बाद भक्तों का दर्शन के लिए तांता लग गया।
एक छत के नीचे सजेगा अद्भुत दरबार:
नवनिर्मित झूलेलाल भवन की दूसरी मंजिल पर बने गर्भगृह में अब आराध्यदेव साईं झूलेलाल के साथ भगवान शिव, श्रीरामदरबार और राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान होंगी। पहले यहां केवल शिवलिंग और मां दुर्गा का विग्रह था। मंदिर के ऊपर सेवा कार्यों के लिए विशाल हॉल का निर्माण भी अंतिम चरण में है। लक्सा, सिगरा और महमूरगंज के बाद यह काशी का चौथा झूलेलाल मंदिर है, जो अब आस्था के साथ-साथ सेवा का भी बड़ा केंद्र बनेगा।
रात 8 बजे होगा ऐतिहासिक पल:
प्राण-प्रतिष्ठा का मुख्य और सबसे भावपूर्ण क्षण आज रात 8 से 10 बजे के बीच आएगा। शिव शांति संत आसूदराम आश्रम लखनऊ के पीठाधीश्वर, सखी की जुगल-जोड़ी सरकार बाबा साईं मोहनलाल साहिब के कर-कमलों से मूर्तियों की अंतिम स्थापना व मंदिर का औपचारिक उद्घाटन होगा। उद्घाटन के तुरंत बाद भव्य महाआरती की जाएगी और रात्रि 10 बजे से विशाल भंडारा-प्रसाद शुरू होगा, जो पूरी रात श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा।
सोलह श्रृंगार से सजे भगवान:
प्राण-प्रतिष्ठा के लिए सभी विग्रहों को विशेष वस्त्र-आभूषणों से सजाया गया है। श्रीराम दरबार में राम-लक्ष्मण धोती-अंगवस्त्र व मुकुट में, माता सीता लाल लहंगा-चोली व नथनी में, हनुमान जी नारंगी लंगोट व मुकुट में दमक रहे हैं। साईं झूलेलाल श्वेत वस्त्र-शाल में, मां दुर्गा लाल जोड़े व त्रिशूल के साथ, राधा-कृष्ण मोरमुकुट-मुरली में, महादेव पीली धोती-अंगवस्त्र में और नंदी महाराज लाल आसन पर विराजमान हैं। श्री गणेश को भी पीली धोती-अंगवस्त्र धारण कराए गए हैं।
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