वाराणसी जिला जेल में 'अवैध वसूली और प्रताड़ना' का खेल? अधिवक्ता शशांक त्रिपाठी ने खटखटाया न्यायपालिका का दरवाजा, SIT जांच की मांगवाराणसी | 1 अप्रैल, 2026
धर्म और न्याय की नगरी काशी में स्थित जिला कारागार एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा विधि प्रकोष्ठ (काशी क्षेत्र) के संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी ने जिला कारागार में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, बंदियों से अवैध वसूली और उनके साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इस संबंध में उन्होंने माननीय मुख्य न्यायाधीश (इलाहाबाद उच्च न्यायालय), जिला जज और जिलाधिकारी वाराणसी को पत्र भेजकर न्यायिक हस्तक्षेप और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सोशल मीडिया पर खुलासे के बाद हड़कंप
प्रार्थना पत्र के अनुसार, यह मामला तब प्रकाश में आया जब उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री श्रीनाथ त्रिपाठी ने सोशल मीडिया (फेसबुक) के माध्यम से जेल के भीतर चल रहे काले खेल को सार्वजनिक किया। आरोपों के मुताबिक, जेल में बंदियों से धन की उगाही की जा रही है और पैसा न देने की सूरत में उनके साथ बेरहमी से मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है।
संविधान और मानवाधिकारों का उल्लंघन
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि ये आरोप सत्य हैं, तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
"बंदी होने का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति के मौलिक अधिकार समाप्त हो गए हैं। जेल मैनुअल और मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाना विधि के शासन के विरुद्ध है।"
जेल में वसूली के खेल को अचूक रणनीति ने पहले भी उठाया था
प्रमुख मांगें: SIT जांच और सुरक्षा
प्रार्थी ने न्यायपालिका से निम्नलिखित कठोर कदम उठाने की अपील की है:
न्यायिक निगरानी में जांच: पूरे प्रकरण की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी या SIT के माध्यम से कराई जाए।
भयमुक्त वातावरण: जांच के दौरान बंदियों के बयान ऐसे माहौल में दर्ज हों जहाँ उन्हें जेल प्रशासन का डर न हो।
दोषियों पर कार्रवाई: प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले जेल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
नियमित निरीक्षण: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जेलों के नियमित न्यायिक निरीक्षण की व्यवस्था सुदृढ़ हो।
न्याय की उम्मीद
बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि यह विषय केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा है। अब देखना यह है कि इस गंभीर शिकायत पर प्रशासन और माननीय उच्च न्यायालय क्या कड़ा रुख अपनाते हैं। इस पत्र ने जेल प्रशासन के भीतर हड़कंप मचा दिया है और कानूनी गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।
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