वाराणसी। कमिश्नरेट पुलिस ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।
कैण्ट पुलिस ने एक ऐसी दरिंदगी का पर्दाफाश किया है जिसने न केवल एक नाबालिग की मासूमियत को रौंदा, बल्कि उसके पूरे परिवार को खौफ के साये में जीने पर मजबूर कर दिया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नाबालिग को बहला-फुसलाकर और डरा-धमकाकर दुष्कर्म करने वाले शातिर आरोपी आजाद चन्द्र सोनकर को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
धमकी से शुरू हुआ था खौफ का खेल
घटना की शुरुआत 29 मार्च 2026 को हुई, जब कैंट थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि एक युवक उनकी नाबालिग बेटी का पीछा कर रहा है और विरोध करने पर परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा है। मामला गंभीर होते ही कैण्ट पुलिस एक्शन मोड में आ गई। जाँच के दौरान पता चला कि आरोपी ने न केवल पीछा किया, बल्कि डरा-धमकाकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को भी अंजाम दिया।
हिस्ट्रीशीटर निकला आरोपी: अपराध की लंबी फेहरिस्त
गिरफ्तार किया गया 20 वर्षीय आजाद चन्द्र सोनकर (निवासी: गिलट बाजार, शिवपुर) कोई नौसिखिया अपराधी नहीं है। उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड बताता है कि वह कानून को ठेंगे पर रखने का आदी है:2021: मारपीट और तोड़फोड़ (थाना शिवपुर)।2025: जानलेवा हमले की कोशिश और धमकी के दो अलग-अलग मामले।ताजा मामला (2026): अब इस पर बीएनएस की धारा 78, 351(3), 64(1) और पाक्सो एक्ट (11/12) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त के कुशल निर्देशन में कैण्ट थाना प्रभारी की टीम ने जाल बिछाया। 31 मार्च की सुबह करीब 09:05 बजे, पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर आरोपी को कैण्ट थाना क्षेत्र से दबोच लिया। आरोपी भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस की घेराबंदी के आगे उसकी एक न चली।
सराहनीय भूमिका निभाने वाली पुलिस टीम:
इस सफल कार्यवाही में कैण्ट थाना प्रभारी शिवाकान्त मिश्र, उप-निरीक्षक सत्यम यादव, उप-निरीक्षक आरती गौड़ और हेड कांस्टेबल बृजेश यादव की मुख्य भूमिका रही। फिलहाल आरोपी को जेल भेज दिया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।
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