चालीहा साहिब: चालीस दिन की तपस्या के बाद बहिराणा विसर्जन, पांडेपुर से वरुणा तक भक्ति का सैलाब
वाराणसी। सिंधु तट के रक्षक, जल-ज्योति स्वरूप, हिन्दू धर्म के रक्षक भगवान श्री झूलेलाल साईं जी का 40 दिवसीय पावन चालीहा साहिब महोत्सव आज पांडेपुर में असीम श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
मान्यता है कि संवत 1007 में सिंध में म्रखशाह के अत्याचार से मुक्ति के लिए सिंधु किनारे 40 दिन की कठोर तपस्या के बाद नसरपुर में माता देवकी के गर्भ से बालक उदेरोलाल के रूप में वरुण देव अवतरित हुए, जिन्होंने पल्ला मछली पर सवार होकर हिन्दू धर्म की रक्षा की। उसी परंपरा में सावन मास में 40 दिन तक घर-घर में चतुर्मुखी दीप, अखंड जोत, लोटी पूजन, चालीसा पाठ और मंत्र जप कर व्रतधारी सात्विक जीवन का पालन करते हैं।
आज मंदिर के गर्भगृह में सजे दिव्य दरबार में आराध्य देव भगवान श्री झूलेलाल साईं जी के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम-जानकी, सिंहवाहिनी माँ दुर्गा, युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण, देवाधिदेव भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग, नंदी महाराज, प्रथम पूज्य श्री गणेश जी, बहिराणा साहिब, अखंड जोत, कलश और स्वास्तिक अंकित हवन कुंड में बोए गए जवारे की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, दीपदान और पल्लव वंदना की गई। पल्लव पाकर बहिराणा विसर्जन के साथ व्रत का पारण हुआ।
तत्पश्चात वरिष्ठ मुखी श्री भावन दास आहूजा ने पवित्र ध्वजा उठाकर भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ किया। "आय लाल सबई चवो झूलेलाल" के गगनभेदी जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। कचहरी मार्ग से होते हुए यात्रा वरुणा कॉरिडोर पहुंची, जहां मां गंगा-वरुणा का पूजन और महाआरती हुई, मार्ग में पुष्प वर्षा से स्वागत हुआ।
मातृ मंडली लक्ष्मी लोकवानी, उषा राजवानी, सुमित्रा आहूजा, पारी देवी द्वारा भजनों पर पारंपरिक डोकला-छेज नृत्य की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।
आयोजन में हरी लाल राजवानी, बद्री सुहाला, दिलीप लोकवानी, विजय लोकवानी, दिनेश चंदानी, रवि घावरी, अजय लोकवानी, बंटी लालवानी, धीरज राजवानी, सतीश माखीजा, सोनू साधवानी सहित पंचायत का सहयोग रहा। सिंधी कॉलोनी में विशाल भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। संत कंवर राम युवा समिति द्वारा मीठा प्रसाद वितरित किया गया। इसी क्रम में सिगरा अमर नगर और लक्सा मंदिर में भी महोत्सव का समापन 56 भोग के साथ हुआ।
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