वाराणसी। कोतवाली थाना क्षेत्र के मध्यमेश्वर इलाके में
महामृत्युंजय मंदिर के समीप पूजा-पाठ की दुकान से सामान एवं दूध की वापसी को लेकर हुए विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। एक ओर शिवांगी सिंह की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने FIR संख्या 0207/2026 दर्ज की है, वहीं दूसरे पक्ष से विकास यादव की तहरीर पर FIR संख्या 0208/2026 दर्ज की गई है। दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 191(2), 351(3) एवं 352 के तहत कार्रवाई की गई है।
शिवांगी सिंह की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि 24 अगस्त 2026 को मध्यमेश्वर स्थित महामृत्युंजय मंदिर के समीप पूजा-पाठ की दुकान पर सामान एवं दूध की वापसी को लेकर विवाद हुआ। आरोप के अनुसार विवाद के दौरान उनके भाई के साथ हाथापाई की गई तथा कृष्णा यादव, विकास यादव, मनोज यादव, गोलू यादव और बच्चे लाल यादव द्वारा मारपीट किए जाने की बात कही गई है। तहरीर में लोहे की रॉड से सिर पर हमला करने तथा कान और चेहरे पर चोट पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है।
वहीं, मामले में दूसरे पक्ष की ओर से विकास यादव ने भी पुलिस को तहरीर देकर क्रॉस FIR दर्ज कराई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले में अपराध संख्या 0208/2026 के तहत उन्हीं धाराओं—BNS की धारा 115(2), 191(2), 351(3) एवं 352—में मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।
अधिवक्ता को कोतवाली बुलाकर दबाव बनाने का आरोप
मामले में नामजद कृष्णा यादव पेशे से अधिवक्ता बताए गए हैं। आरोप है कि क्रॉस FIR दर्ज होने के बाद उन्हें बार-बार कोतवाली बुलाकर परेशान किया जा रहा था तथा उन पर दबाव बनाया जा रहा था। कृष्णा यादव ने इस संबंध में अपने साथी अधिवक्ताओं तथा बनारस बार एसोसिएशन के महामंत्री सुधांशु मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया।
इसके बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता कोतवाली मैदागिन पहुंचे। अधिवक्ताओं का आरोप है कि वहां मौजूद कोतवाल दया शंकर सिंह ने बातचीत के दौरान अधिवक्ताओं के साथ कथित तौर पर तुम-तड़ाक की भाषा का प्रयोग किया, जिस पर अधिवक्ताओं ने तीखी नाराजगी जताई।
अधिवक्ताओं ने पुलिस अधिकारी के व्यवहार पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के साथ बातचीत में मर्यादा और सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए। मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने कथित व्यवहार की पुनरावृत्ति नहीं करने की हिदायत भी दी।
इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अध्यक्ष पद के प्रत्याशी राजेश प्रसाद सिंह, संजय लालवानी, उपाध्यक्ष अधिवक्ता सतीश यादव, उपाध्यक्ष जितेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। अधिवक्ताओं की संख्या सैकड़ों में बताई गई।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि किसी अधिवक्ता के खिलाफ कोई शिकायत या मुकदमा है तो पुलिस नियमानुसार जांच और कानूनी कार्रवाई करे, लेकिन किसी भी पक्ष के साथ अनावश्यक दबाव अथवा अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए।
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से दर्ज मुकदमों के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है। मारपीट, चोट तथा अन्य आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

