साल पुराने आदेश पर भी अमल नहीं, फाइल फेंकने का आरोप: हाईकोर्ट को पत्र भेजने की तैयारी में अधिवक्ता
विक्की मध्यानी
वाराणसी। सदर तहसील में एसडीएम नितिन सिंह और अधिवक्ताओं के बीच विवाद गहराता जा रहा है। तहसील बार एसोसिएशन सदर ने एसडीएम पर भ्रष्टाचार बढ़ाने, मनमाने आचरण, वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अपमानित करने और शासनादेशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी व इलाहाबाद हाईकोर्ट को पत्र भेजा है।
क्या हैं बार के मुख्य आरोप?
चार साल पुराने आदेश का अनुपालन नहीं: वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद राय के मुताबिक 16/06/2026 को जब वे आदेश के क्रियान्वयन को लेकर एसडीएम से मिले तो उन्हें घंटों इंतजार कराया गया। चैंबर में बात सुनने के बजाय शिकायती पत्र टेबल पर फेंककर बाहर जाने को कहा गया।
जनसुनवाई में उपेक्षा:आरोप है कि एसडीएम फरियादियों की भीड़ को चैंबर के बाहर खड़ा रखते हैं और खुद चैंबर में बैठकर दिवानी व फौजदारी कार्यों को निपटाते हैं, जिससे आमजन व अधिवक्ताओं में रोष है।
वीआईपी का हवाला: पत्र में कहा गया कि जब भी PM या CM वाराणसी आते हैं तो एसडीएम कहते हैं रोज वीआईपी आते रहते हैं, इसलिए काम नहीं हो पा रहा" जिससे अधिवक्ता समाज आहत है।
भ्रष्टाचार का आरोप: प्रस्ताव में स्पष्ट लिखा है कि एसडीएम सदर के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर है और तहसील सदर के व्यापक भ्रष्टाचार के लिए एसडीएम नितिन सिंह जिम्मेदार हैं।"
बार का चार सूत्रीय अल्टीमेटम
महामंत्री दिवेश कुमार व अध्यक्ष अनिल बिन्द द्वारा पारित प्रस्ताव में मांग की गई है:
जब तक एसडीएम का गैर जनपद तबादला नहीं होता, कोर्ट का अनिश्चितकालीन बहिष्कार रहेगा।
सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति से एसडीएम के आचरण की न्यायिक जांच हो।
एसडीएम के विधि विरुद्ध आदेशों की उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच कराई जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट को पत्र भेजकर तहसील सदर में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की मांग की जाए।
एसडीएम का पक्ष: "व्यवस्था बनाए रखने को कहा था"
इस संबंध में एसडीएम नितिन सिंह का कहना है, "मंगलवार को जनसुनवाई में काफी भीड़ थी। मैं चैंबर में सुनवाई कर रहा था। अधिवक्ता बाहर प्रतीक्षा कर रहे थे। अंदर आने पर उन्होंने बीच में ही बात शुरू कर दी। मैंने सिर्फ इतना कहा कि एक व्यक्ति की बात पूरी होने तक प्रतीक्षा कर लें। इसी बात पर वह नाराज हो गए और तेज आवाज में बातें करने लगे। तभी मैंने उन्हें बाहर जाने को कहा क्योंकि जनसुनवाई बाधित हो रही थी। पिछले दो दिन से धरना चल रहा है। आज भी मैंने बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन कोई नहीं आया।"
तहसील में कामकाज ठप
पूर्व अध्यक्ष रविंद्र कुमार व पूर्व महामंत्री सुरेंद्र कुमार के प्रस्ताव पर बार ने आंदोलन तेज कर दिया है। प्रतिलिपि बनारस बार एसोसिएशन व सेंट्रल बार को भी भेजी गई है।
आज धरना-प्रदर्शन में अधिवक्ता धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, दीपक राय, रविन्द्र यादव, आन्नद सिंह, सुरेन्द्र कुमार, दिलिप कुमार, अमरेश कुमार, प्रितम सहित अनेकों अधिवक्ता उपस्थित रहे।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा। फिलहाल तहसील में न्यायिक कार्य पूरी तरह प्रभावित दिख रहा है।



