आज रात से 15 दिनों के लिए बंद होंगे दर्शन
✍️सुकन्या सिंह
वाराणसी। धर्मनगरी काशी में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक स्नान यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का काशी के 84 घाटों के पवित्र गंगाजल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष जलाभिषेक किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिव्य स्नान के बाद तीनों विग्रह अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके कारण आगामी 15 दिनों तक भक्तों को उनके दर्शन नहीं होंगे। इसके बाद भगवान नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देंगे और रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत होगी।
सोमवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त में मंगला आरती के साथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ हुआ। भगवान को पांच प्रकार के मेवों का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद अस्सी घाट से डमरू दल, महिलाओं की टोली और बड़ी संख्या में श्रद्धालु कलश में गंगाजल लेकर भव्य शोभायात्रा के रूप में भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। पूरे मार्ग में जय जगन्नाथ के जयघोष और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मंदिर पहुंचने पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विधि-विधान से जलाभिषेक किया गया। इस अवसर पर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह उत्सव भक्तों को भगवान के प्रति समर्पण और लोककल्याण की भावना का संदेश देता है।
दिनभर मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। भक्तों ने भगवान को गंगाजल, तुलसी की माला, फल, पुष्प एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस विशेष अवसर पर भगवान जगन्नाथ को गुलाबी रंग के आकर्षक वस्त्रों से अलंकृत किया गया तथा मंदिर के गर्भगृह के ऊपर बने विशेष सिंहासन पर विराजमान कर भक्तों को दिव्य दर्शन कराए गए। स्नान यात्रा के सफल आयोजन से संपूर्ण काशी भक्तिमय वातावरण में सराबोर रही।
