40 आदिवासी महिलाएं पहली बार छोड़ीं द्वार, देखा यह शहर
अनिल मौर्या
चंदौली। पुलिस की छवि केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय सरोकार भी उसकी पहचान बन सकते हैं। इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब मिशन शक्ति अभियान के तहत वाराणसी जोन के डीआईजी वैभव कृष्ण की पहल पर चंदौली के पंडी गांव की 40 आदिवासी महिलाओं को पहली बार वाराणसी शहर की सैर कराई गई।
पहाड़ों और जंगलों से घिरे इस गांव की अधिकांश महिलाएं इससे पहले कभी शहर नहीं गई थीं। पुलिस की विशेष बस से 40 महिलाओं और 10 पुरुषों को वाराणसी लाया गया, जहां इन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ, दुर्गाकुंड और संकटमोचन मंदिर के दर्शन किए। यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए दो इंस्पेक्टर तथा चार दरोगा तैनात रहे।
इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक दर्शन कराना नहीं, बल्कि आदिवासी ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ना, उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना और उन्हें नए अनुभवों से परिचित कराना भी था। पहली बार काशी की भव्यता और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखकर महिलाओं के चेहरे पर उत्साह और प्रसन्नता साफ दिखाई दी।
डीआईजी वैभव कृष्ण की यह पहल दर्शाती है कि पुलिस यदि संवेदनशील सोच के साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे तो उसका सकारात्मक प्रभाव केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास, अपनापन और नई उम्मीद भी पैदा करता है।
