सनसनीखेज: चकिया में 'रिमोट कंट्रोल' पर चल रही हैं पैथोलॉजी? मरीजों की जान से 'डिजिटल' खिलवाड़!

चंदौली/चकिया: क्या आपकी पैथोलॉजी रिपोर्ट वाकई किसी डॉक्टर ने देखी है, या सिर्फ एक मशीन और डिजिटल हस्ताक्षर ने उसे 'पास' कर दिया? 


चकिया क्षेत्र में संचालित निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को लेकर आए दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। कागजों पर 'फिट' दिखने वाले ये सेंटर जमीन पर 'अनफिट' सिस्टम के सहारे चल रहे हैं।

कागजी पैथोलॉजिस्ट और 'गायब' विशेषज्ञ

सूत्रों और स्थानीय निवासियों का दावा है कि कई सेंटरों ने रजिस्ट्रेशन के लिए योग्य पैथोलॉजिस्ट के दस्तावेजों का उपयोग तो किया है, लेकिन वे डॉक्टर सेंटर पर कभी नजर नहीं आते।

  • बड़ा आरोप: रिपोर्ट पर डॉक्टर के फिजिकल सिग्नेचर के बजाय डिजिटल हस्ताक्षर या बाहरी विशेषज्ञों के नामों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

  • जोखिम: बिना विशेषज्ञ की निगरानी के तैयार रिपोर्ट गलत हो सकती है, जिससे मरीज का पूरा इलाज ही गलत दिशा में जा सकता है।सरकारी अस्पताल के पास 'अंधेरगर्दी'

  • हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई संदिग्ध सेंटर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की नाक के नीचे चल रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है:

क्या विभाग के पास नियमित निरीक्षण का समय नहीं है?

क्या इन सेंटरों और सरकारी कर्मचारियों के बीच कोई 'सीक्रेट नेटवर्क' काम कर रहा है?
जरूरी सच: जिसे जानना आपके लिए अनिवार्य है
पैथोलॉजी रिपोर्ट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपके जीवन का आधार है। गलत रिपोर्ट का मतलब है गलत दवा, और गलत दवा का मतलब है सीधा जान को खतरा। चकिया प्रशासन को चाहिए कि वह 'कागजी खानापूर्ति' से ऊपर उठकर मरीजों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए।

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