तो क्या 16 लाख की घूस और अंतहीन इंतजार ने ली शिक्षक की जान

देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल शिक्षा विभाग को झकझोर कर रख दिया है,


बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के काले चेहरे को भी बेनकाब कर दिया है। कुशीनगर निवासी एक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने शनिवार सुबह फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मरने से पहले उन्होंने एक वीडियो और चार पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा है, जो अब विभाग के लिए 'मौत का वारंट' बनता जा रहा है।

कर्ज का बोझ और 'बाबू' का  दबाव 


मृतक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह (37) गौरीबाजार के मदरसन स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में तैनात थे। परिजनों और सुसाइड नोट के मुताबिक, साल 2022 से रुके हुए वेतन को बहाल कराने के नाम पर बीएसए कार्यालय के एक लिपिक (बाबू) ने भारी-भरकम रकम की मांग की थी।

सौदा: 20 लाख रुपये की मांग की गई, जो बाद में 16 लाख रुपये पर तय हुई।

मजबूरी: रकम जुटाने के लिए शिक्षक ने पत्नी के गहने बेचे, पुश्तैनी जमीन गिरवी रखी और बैंक से कर्ज लिया।

धोखा: 16 लाख रुपये देने के बाद भी वेतन जारी नहीं हुआ और शुक्रवार को कार्यालय में उन्हें कथित तौर पर अपमानित किया गया।

"मैं जीना चाहता था..." – सीएम को संबोधित भावुक पत्र

सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए लिखा कि वह अपनी पत्नी और बच्चों के लिए जीना चाहते थे, लेकिन कर्जदारों के दबाव और विभाग के अपमान ने उन्हें टूटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से बीएसए कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है।

प्रशासनिक हड़कंप: आरोपी बाबू निलंबित, FIR दर्ज


मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं:

निलंबन: मुख्य आरोपी पटल सहायक संजीव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

FIR: परिजनों की तहरीर पर संबंधित थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।


जांच टीम: सीडीओ (CDO) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच टीम (एसडीएम सदर और डीआईओएस शामिल) गठित की गई है।

सुसाइड नोट 4 पेज का पत्र और एक वीडियो बयान

पीछे छूटा परिवार भाई, पत्नी और दो मासूम बच्चे (बेटी आस्था और बेटा)

शिक्षक की अंतिम अपील: अपने आखिरी संदेश में कृष्ण मोहन ने अपने भाई से परिवार का ख्याल रखने की गुहार लगाई है। उन्होंने अपनी बेटी के सुकन्या खाते और बीमा पॉलिसियों का जिक्र कर जाते-जाते भी पिता होने का धर्म निभाया, लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने उनसे उनका जीवन छीन लिया

जिले का शिक्षा विभाग हमेशा  विवादित रहा है जिसको अचूक रणनीति समाचार पत्र प्रकाशित  करता रहा है 

आपको बता दे जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय भी हमेशा विवादों में रहा है स्वयं शिवनारायण सिंह और उनके सहयोगी पर ग्राम बसंतपुर के अवध बिहारी त्रिपाठी ने कई आरोप लगाए हैं समस्या यह है जिला अधिकारी महोदय को किए गए शिकायत का ध्यान नहीं रहता है देखना है आने वाले समय में जिला अधिकारी महोदय क्या कार्यवाही करती है

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