बताउंगा नो मोर... मंत्री रहे हैं साईकिल चोर !

वर्तमान सियासत साफ़ छवि वालों के लिए है ही नहीं। आज के दौर में वही शख्स सफल नेता है, 


जिसका अतीत दुर्दांत, कुख्यात या दाग़दार रहा हो। ऐसे लोग सत्ता के शागिर्द होते हैं। मेरी बातों से इत्तेफ़ाक़ न हो तो सफल सियासी चेहरों का इतिहास उठाकर देख लीजिए अतीत दाग़दार ही मिलेगा। जो बेदाग़ और साफ़ छवि के होते हैं, वह खुद-ब-खुद किनारे लग जाते हैं या लगा दिए जाते हैं।


 बहरहाल, बात वर्तमान सत्ता के एक ऐसे सियासी चेहरे की है, जो अतीत में साइकिल चोर था और वर्तमान में मंत्री है। समय 1986–87, दोपहर के लगभग दो बजे, स्थान बीएचयू हॉस्टल। अचानक “चोर…चोर…चोर” के शोर के बीच एक युवक की पिटाई हो रही है। हॉस्टल के लड़के उसे पीट रहे हैं। उसी हॉस्टल का एक सीनियर आता है और पहली बार साइकिल चोरी में पकड़े गए उस चोर को माफ़ी मंगवाकर, दोबारा ऐसी गलती न करने की चेतावनी दिलाकर छुड़वा देता है। मार खाया वह चोर छूटते ही फरार हो जाता है। 


मगर जिसे चोरी की आदत लग जाए, वह छूटती कहाँ है। कुछ महीनों बाद फिर वही “चोर…चोर” और वही चेहरा पकड़ा जाता है। इस बार हॉस्टलर उसे मारते-मारते अर्धनग्न कर देते हैं कपड़े फाड़ दिए जाते हैं, सिर्फ़ अंडरवियर रह जाता है। मौका पाते ही वह उसी हालत में भाग निकलता है। इसके बाद भी कई बार वह ऐसी हरकतों में पिटाई खा चुका होता है।


 इन घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी, उसी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले, वर्तमान में एक बड़े कॉलेज के प्रोफ़ेसर बताते हैं कि एक बार तो हॉस्टल के लड़के चोरी करते पकड़े जाने पर उसे पूरी तरह नंगा करने पर उतारू हो गए थे, तब मैंने ही रोका जाने दो, अंडरवियर मत फाड़ो। कालांतर में वही साइकिल चोर एक सियासी दल का एक जिले का हेड बना, उसी दल से सदन जाने का दांव आज़माया, फिर पाला बदलकर दूसरे दल में आया और आज मंत्री है। अतीत साइकिल चोर, वर्तमान सत्ता का चेहरा यही है आज की सियासत की असली तस्वीर। सियासत में ऐसे कई उदाहरण हैं जिनका अतीत एकदम काला रहा है मगर आज झक सफ़ेद कुर्ते में माननीय बने हुये हैं।


विनय मौर्या 

बनारस ।

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