लोलार्क षष्ठी पर काशी में आस्था का महाकुंभ: लोलार्क कुंड में 3 किमी लंबी कतार,

  30 सेकंड में डुबकी लगा मांग रहे संतान सुख



वाराणसी: धर्म की नगरी काशी में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। भदैनी स्थित पौराणिक लोलार्क कुंड में आधी रात 12 बजते ही हर-हर महादेव और सूर्य देव के जयकारों के बीच पवित्र स्नान शुरू हुआ। संतान प्राप्ति की कामना लेकर देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की कतार करीब तीन किलोमीटर लंबी होकर पांडेय हवेली तक पहुंच गई।

कड़े सुरक्षा घेरे में आस्था का प्रवाह

भीड़ के भारी दबाव को देखते हुए प्रशासन ने पूरे भदैनी क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश रोक दिया है।


  • डबल व जिग-जैग बैरिकेडिंग: कतार को व्यवस्थित रखने के लिए पूरे मार्ग पर डबल बैरिकेडिंग और कुंड के मुहाने पर जिग-जैग गलियारे बनाए गए हैं।

  • छांव और सुविधा: धूप व उमस से बचाने के लिए कतारों के ऊपर टेंट व कपड़ों से छांव की गई है।

  • समय सीमा: हर श्रद्धालु जोड़े को कुंड में पवित्र डुबकी लगाने के लिए अधिकतम 30 सेकंड का समय मिल रहा है, ताकि पीछे खड़े लोगों को घंटों इंतजार न करना पड़े।


  • दान और संकल्प: वैदिक ब्राह्मणों से संकल्प कराकर श्रद्धालु कुंड में उतर रहे हैं और परंपरा अनुसार फल का दान कर वहीं पुराने वस्त्र त्याग रहे हैं।


मान्यता: जहां गिरा था सूर्य के रथ का पहिया
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन स्थल पर भगवान सूर्य के रथ का पहिया (अर्क) गिरा था, जिसके चलते यह कुंड 'लोलार्क' कहलाया। मान्यता है कि षष्ठी तिथि पर इस सूर्य तीर्थ में दंपतियों द्वारा एक साथ स्नान-पूजन करने से वंश वृद्धि होती है और चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है।


ड्रोन से चप्पे-चप्पे पर नजर
सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को जोन, सेक्टर और सब-सेक्टर में बांटा गया है। भारी पुलिस बल के साथ-साथ कुंड, मंदिर परिसर और संकरी गलियों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों और अत्याधुनिक ड्रोन से पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं को बिना किसी व्यवधान के सुरक्षित दर्शन-स्नान कराने के लिए अतिरिक्त रिज़र्व पुलिस बल भी मुस्तैद है।


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