संस्कृत महाविद्यालय की प्रबंध समिति में फर्जीवाड़े का आरोप, अनिल यादव की पहली जमानत अर्जी खारिज
वाराणसी। श्री रामानन्द पीठ संस्कृत महाविद्यालय, कर्णघण्टा की करोड़ों रुपये की संपत्ति और प्रबंध समिति पर कथित कब्जे के प्रयास के मामले में आरोपी अनिल कुमार यादव को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-6 आलोक कुमार की अदालत ने अनिल कुमार यादव की पहली जमानत अर्जी खारिज कर दी।
बीमार अध्यक्ष के नाम पर फर्जी हलफनामा बनाने का आरोप
मामले में आरोप है कि संस्था के निर्वाचित अध्यक्ष महंत ईश्वर दास के अस्वस्थ होने का फायदा उठाकर प्रबंध समिति पर कब्जे की साजिश रची गई। आरोप के मुताबिक महंत ईश्वर दास के नाम से कूटरचित हलफनामा तैयार किया गया और उस पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। इसी दस्तावेज के आधार पर संस्था के वैध पदाधिकारियों को हटाकर नई कार्यकारिणी गठित किए जाने का दावा किया गया।
पुलिस की विवेचना में हलफनामे पर किए गए हस्ताक्षर को कथित तौर पर फर्जी पाया गया। वहीं कार्यकारिणी की बैठक में शामिल दिखाए गए कुछ सदस्यों ने पुलिस को बताया कि उन्हें ऐसी किसी बैठक की जानकारी ही नहीं थी।
जिनकी मौत हो चुकी, उन्हें भी बना दिया सदस्य
मामले में फर्जीवाड़े का एक और गंभीर आरोप सामने आया। पुलिस के अनुसार वर्ष 2025-26 की सदस्य सूची में विजय शंकर उपाध्याय और अशोक कुमार सिंह के नाम भी शामिल किए गए, जबकि दोनों की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।
आरोप है कि फर्जी तरीके से तैयार की गई कार्यकारिणी और सदस्य सूची के आधार पर सहायक निबंधक फर्म, सोसायटी एवं चिट्स कार्यालय से पंजीकरण संबंधी दस्तावेज हासिल किए गए। इसके बाद संबंधित दस्तावेज सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय को भी भेजे गए।
छह लोगों पर मुकदमा, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
मामले में थाना चौक में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 340(2), 351(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज है। अनिल कुमार यादव के अलावा अवध बिहारी दास, नारायन सिंह, कृष्ण कुमार पाण्डेय, संजीव कुमार त्रिपाठी और यशराज सिंह को भी आरोपी बनाया गया है।
अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत अर्जी का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता और विवेचना में सामने आए कथित साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा गया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अनिल कुमार यादव की पहली जमानत अर्जी खारिज कर दी।
मामला करोड़ों की संपत्ति से जुड़ा होने के साथ संस्था की प्रबंध समिति पर कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे के प्रयास से संबंधित है। अब आरोपियों के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया और पुलिस विवेचना पर नजर बनी हुई है।
