RSS मुख्यालय के सामने मनुस्मृति और ड्रेस जलाने पर गरमाई सियासत

भाजपा विधि प्रकोष्ठ ने LG व दिल्ली पुलिस से की FIR और सख्त कार्रवाई की मांग



नई दिल्ली/वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दिल्ली स्थित मुख्यालय के बाहर हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान मनुस्मृति की प्रतियां और संघ की प्रतीकात्मक ड्रेस जलाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधि प्रकोष्ठ–काशी क्षेत्र के संयोजक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त, डीसीपी और पहाड़गंज थाना प्रभारी को औपचारिक प्रार्थना-पत्र भेजा है। उन्होंने घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

30 अगस्त और 1 सितंबर की घटनाओं का दिया हवाला

भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि 30 अगस्त को भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में RSS मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर मनुस्मृति की प्रतियां जलाई गईं। वहीं, 1 सितंबर को कांग्रेस नेता उदित राज के नेतृत्व में संघ के कार्यालय 'केशव कुंज' के सामने प्रदर्शन करते हुए RSS की प्रतीकात्मक ड्रेस को आग के हवाले किया गया।

'विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ना अस्वीकार्य'

शशांक शेखर त्रिपाठी ने अपने प्रार्थना-पत्र में स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध की आड़ में कानून का उल्लंघन कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "राजनीतिक पद या संगठन का रसूख किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाता।"

डिजिटल फॉरेंसिक जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित करने की मांग

अधिवक्ता त्रिपाठी ने प्रार्थना-पत्र के साथ संबंधित वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट, फोटो और समाचार रिपोर्टों के डिजिटल साक्ष्य संलग्न किए हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि:

  • घटनास्थल के सभी CCTV फुटेज, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जाए।

  • जांच में प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होने और कानूनी आधार बनने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई व गिरफ्तारी की जाए।

  • दर्ज होने वाली FIR की संख्या, लागू धाराएं, जांच अधिकारी का नाम और की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।

इस शिकायत के बाद अब सबकी नजरें दिल्ली पुलिस और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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