संवैधानिक मर्यादा पर चोट गहरी : वाराणसी के अधिवक्ताओं ने फूंका आक्रोश का बिगुल

विदेशी परस्त सोच और अराजक तत्व देश की एकता को छलनी करना चाहते हैं, युवा पीढ़ी को भ्रम के जाल से निकालना होगा


विक्की मध्यानी

वाराणसी। देश की संवैधानिक संस्थाओं और सर्वोच्च पदों के विरुद्ध हाल के दिनों में उभरे अभद्र, उच्छृंखल और संस्कारहीन आचरण से अधिवक्ता समाज व्यथित है। इसी पीड़ा को स्वर देने के लिए 18 अगस्त को दीवानी न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवप्रकाश सिंह के पत्रकारपुरम स्थित आवास पर प्रबुद्ध एवं युवा अधिवक्ताओं की एक अहम बैठक संपन्न हुई।

बैठक में वक्ताओं ने गहरी चिंता व्यक्त की कि कुछ विदेशी परिवेश में पले-बढ़े और हवाई सफर कर लौटे तथाकथित युवा, भारत की लोकतांत्रिक विरासत को समझे बिना सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री और माननीय मुख्य न्यायाधीश जैसे संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए अपमानजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि आलोचना का अधिकार लोकतंत्र का आभूषण है, पर मर्यादा की लक्ष्मण रेखा लांघकर गाली-गलौज करना राष्ट्र की आत्मा पर प्रहार है।

हाल ही में मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी को लेकर उपजे विवाद का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जब शीर्ष अदालत ने स्वयं स्थिति स्पष्ट कर दी थी, तब भी कुछ तत्वों ने जानबूझकर भ्रम और विद्वेष का कोहरा फैलाया। आंदोलन के नाम पर सार्वजनिक स्थलों पर बोतलें फेंकना, आपत्तिजनक नारे लगाना और अश्लील गीतों पर फूहड़ प्रदर्शन करना, यह युवा चेतना नहीं बल्कि संस्कारों का दिवालियापन है।

अधिवक्ताओं ने आशंका जताई कि विदेशी फंडिंग, नशे के कारोबार और कोचिंग माफियाओं के इशारे पर देशद्रोही तत्वों को मोहरा बनाकर 140 करोड़ जनता के बहुमत से चुनी गई सरकार और संवैधानिक पदों को निशाना बनाया जा रहा है। इसका मकसद भारत की आर्थिक तरक्की, मेहनती और अभावग्रस्त परिवारों से निकले छात्रों की उड़ान को पंगु बनाना है।

वरिष्ठ अधिवक्ता शिवप्रकाश सिंह ने सभी उपस्थित जनों का आह्वान किया कि वे समाज में जाकर लोगों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं का कर्तव्य सिर्फ मुकदमे लड़ना नहीं, बल्कि संविधान की रक्षा, कानून के राज और सामाजिक समरसता को अक्षुण्ण रखना भी है।

बैठक का संचालन अरुण कुमार सिंह अधिवक्ता ने किया। इस अवसर पर कृष्णनिधि पांडेय, शिवशंकर राय, राजेश द्विवेदी, विनय प्रकाश चतुर्वेदी, नितेश पाल, पंकज सिंह, अतुल पांडेय, प्रशांत शेखर पांडेय, दुष्मंत सिंह, अनुराग पांडेय, मनोज पांडेय, देवेंद्र कुमार, विवेक पांडेय, सोनू यादव, विनय कुमार पटेल, राजन पटेल, अवधेश कुमार पटेल, प्रदीप कुमार सिंह, अतुल कुमार पटेल, अमरपाल, राकेश प्रताप सिंह, विपिन पाल, विजय पांडेय, राघवेंद्र प्रताप सिंह, राहुल, संदीप सिंह, हर्षित सिंह, बृजेश सिंह उर्फ रामबाबू, आलोक पांडेय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

समापन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर संवैधानिक पदों के अपमान की कड़ी निंदा की गई और देश की एकता-अखंडता की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।



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