शिवांजलि' से गूंजेगा लोक-संगीत

गौना महोत्सव के अवसर पर टेढ़ीनीम महंत आवास में 'शिवांजलि' कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा।



पुनित पागल के संयोजन में लोक एवं सुगम संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। काशी की पारंपरिक धुनों पर आधारित भक्ति गीत आयोजन को सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान करेंगे।

काशी की जीवंत परंपरा का उत्सव

पत्रकार वार्ता में महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने कहा कि रंगभरी एकादशी और गौरा का गौना काशी की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। पहां बेद और लोक एक-दूसरे के पूरक बनकर आस्था को उत्सव में परिवर्तित करते हैं।


नौ गौरी-नौ दुर्गा के मंत्रों से पूजित हल्दी, गौनहारिनों के मधुर मंगलगीत, ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चार और नगर की आत्मीय सहभागिता-ये सभी मिलकर काशी की सांस्कृतिक आत्मा को

24 फरवरी की संध्या से आरंभ होकर 27 फरवरी की रंगभरी एकादशी तक चलने वाला यह मांगलिक क्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक सजीव करते हैं।


विरासत का संरक्षण भी है। देवों की नगरी काशी में यह परंपरा इतिहास भर नहीं, बल्कि वर्तमान में जीवित आस्था है- जहां हर वर्ष गौरा का गौना नगर को एक सूत्र में पिरो देता है और यह संदेश देता है कि परंपराएं तभी जीवंत रहती हैं, जब समाज उन्हें उत्सव बनाकर निभाता है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने