वाराणसी |धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी में मानवता की एक अनूठी मिसाल कायम हुई है।
साधना फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सौरभ मौर्य ने रविवार को अपना 226वाँ स्वैच्छिक रक्तदान पूरा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। वर्ष 2007 से शुरू हुआ उनका यह सेवा का सफर आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
कैंसर मरीजों की राह की आसान
डॉ. मौर्य का यह अभियान विशेष रूप से उन कैंसर मरीजों के लिए है, जो पूर्वांचल और पड़ोसी राज्यों से इलाज के लिए वाराणसी आते हैं। अक्सर देखा जाता है कि बाहरी राज्यों से आने वाले मरीजों के पास रक्तदाताओं की व्यवस्था नहीं होती। डॉ. मौर्य ने बताया:
"हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाराणसी के किसी भी कैंसर अस्पताल में कोई भी मरीज सिर्फ इसलिए दम न तोड़े क्योंकि उसके पास समय पर रक्त उपलब्ध नहीं था।"
सम्मान और उपलब्धियां
उनके इस अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है:
भारतीय सेना द्वारा ‘राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार’।
आईकॉनिक पीस अवॉर्ड काउंसिल द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि।
अनेकों अन्य राष्ट्रीय स्तर के सम्मान।
समाज को संदेश: "रक्तदान ही महादान"
रक्तदान के बाद डॉ. मौर्य ने जनता से अपील की कि स्वस्थ युवाओं को डर छोड़कर आगे आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि रक्तदान से न केवल किसी की जान बचती है, बल्कि यह दान करने वाले के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
साधना फाउंडेशन के माध्यम से डॉ. मौर्य न केवल रक्त की कमी को दूर कर रहे हैं, बल्कि समाज में व्याप्त भ्रांतियों को मिटाकर स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति एक नई चेतना जगा रहे हैं।
#BloodDonation #DonateBloodSaveLife #VaranasiNews #HumanityFirst #SadhnaFoundation #DrSaurabhMaurya #Raktveer #CancerSupport #VoluntaryBloodDonation #InspiringIndia #Mahadan #BanarasDiaries #KashiService #226TimesBloodDonation #NationalGauravAward #SavingLives #BloodHero #Varanasi #SocialService #Humanity
