दालमंडी में उजड़ता कारोबार” “चौड़ीकरण के नाम पर छीनी जा रही पीढ़ियों की रोज़ी-रोटी”“मुआवज़े में भारी अनियमितता का आरोप”

 दालमंडी बाजार में चौड़ीकरण के नाम पर ध्वस्तीकरण अभियान जारी है,

प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके भवनों से वर्षों से व्यावसायिक टैक्स वसूला जाता रहा, बिजली का बिल भी व्यवसायिक दर से लिया गया, लेकिन जब मुआवजे की बात आई तो उसे आवासीय मानकर बेहद कम राशि तय कर दी गई। दालमंडी में लगभग 95 प्रतिशत किरायेदार चौड़ीकरण से प्रभावित हैं। आरोप है कि यहां दुकानें 30-40 लाख रुपये ‘नज़राना’ लेकर दी जाती हैं, लेकिन न बिल्डर रसीद देते हैं, न मकान मालिक। अब कहा यह जा रहा है कि मकान मालिकों पर दबाव डालकर रजिस्ट्री कराई जा रही है और किरायेदारों को बिना किसी मुआवजे के बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

कई लोगों की पीड़ा यहीं खत्म नहीं होती। उनका कहना है कि सर्किल रेट वर्षों से नहीं बढ़ाया गया, जबकि आसपास के जिलों में हर साल इसमें बढ़ोतरी हुई। नतीजा यह हुआ कि भूमि और भवनों का वास्तविक मूल्यांकन नहीं हो पाया और भू-अधिग्रहण के नियमों की अनदेखी कर मुआवजा तय किया गया। कई प्रभावितों का आरोप है कि 15 से 30 वर्ष पुराने नोटिसों के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है, जबकि वर्तमान परिस्थितियों और बाजार मूल्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। सबसे बड़ी बात यह कही जा रही है कि प्रभावित लोगों को विश्वास में लिए बिना ही कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

बहरहाल, शासन और प्रशासन को इस पूरे मामले का संवेदनशीलता से संज्ञान लेना चाहिए और प्रभावित लोगों की समस्याओं का न्यायसंगत समाधान निकालना चाहिए, ताकि विकास के साथ भरोसा भी कायम रह सके।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने