ऐतिहासिक बाजार को धरोहर बताते हुए ध्वस्तीकरण का विरोध, एसडीएम व पीडब्ल्यूडी से हुआ संवाद प्रशासन ने नवीनीकरण को बताया जनहित में
विक्की मध्यानी
वाराणसी।दालमंडी चौड़ीकरण के प्रस्ताव के विरोध में शनिवार सुबह सैकड़ों की संख्या में दालमंडी क्षेत्र के दुकानदार व स्थानीय निवासी तहसील पहुंचे। इस दौरान व्यापारियों और निवासियों ने अपने प्रतिष्ठान टूटने की आशंका को लेकर प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा।
व्यापारियों ने कहा कि दालमंडी बाजार सैकड़ों वर्षों पुराना है और काशी की ऐतिहासिक विरासत व सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह बाजार आम जनता को उचित मूल्य पर रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध कराता है। ऐसे में बाजार को तोड़ना पूरी तरह से निराधार और अन्यायपूर्ण है। दुकानदारों ने चेतावनी दी कि यदि चौड़ीकरण के नाम पर बाजार को ध्वस्त किया गया तो 200 से अधिक परिवार सीधे तौर पर बेरोजगार हो जाएंगे।
व्यापारियों ने प्रशासन को वैकल्पिक सुझाव देते हुए कहा कि दालमंडी को तोड़ने के बजाय दशाश्वमेध थाने के सामने से मार्ग का चौड़ीकरण किया जा सकता है, जहां मात्र लगभग 25 मकानों को ही ध्वस्त करना पड़ेगा। इसके अलावा नारियल बाजार सहित अन्य मार्ग भी चौड़ीकरण के लिए उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर आने वाले दर्शनार्थियों की आवाजाही के लिए किया जा सकता है।
इस मौके पर उप जिलाधिकारी नितिन सिंह ने उपस्थित लोगों से संवाद करते हुए कहा कि शहर में नवीनीकरण के तहत कई स्थानों पर चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में दालमंडी क्षेत्र में भी चौड़ीकरण प्रस्तावित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि क्षेत्र को और सुंदर, सुविधाजनक व सुलभ बनाना है। चौड़ीकरण से बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों, ग्राहकों और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा भविष्य में एंबुलेंस और अन्य बड़ी गाड़ियों के आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
वहीं पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने भी अपने संबोधन में कहा कि यह परियोजना जनपद की जरूरतों के अनुरूप है और इसी तरह का चौड़ीकरण अन्य क्षेत्रों में भी किया जा चुका है। दालमंडी भी इसी विकास योजना का हिस्सा है और आगे आवश्यकता के अनुसार अन्य स्थानों पर भी नवीनीकरण का कार्य किया जाएगा।
संवाद के बाद व्यापारियों ने मांग की कि किसी भी निर्णय से पहले उनकी बातों पर गंभीरता से विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे विकास के साथ-साथ दालमंडी की ऐतिहासिक पहचान और लोगों की रोजी-रोटी सुरक्षित रह सके।
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