देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है।
श्री प्रकाश संस्कृत विद्यालय बसन्तपुर' में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले और कूट रचित दस्तावेजों के सहारे सरकारी धन हड़पने के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। जनपद के सत्र न्यायाधीश धनेन्द्र प्रताप सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन नामजद शिक्षकों की अग्रिम जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।
फर्जीवाड़े का जाल: बिना मान्यता, फिर भी मिला करोड़ों का वेतन
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| फोटो की गंभीरता बचा लो जिला विद्यालय निरीक्षक |
यह पूरा मामला गौरीबाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रकाश संस्कृत महाविद्यालय से जुड़ा है। जाँच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह महाविद्यालय गैर-मान्यता प्राप्त है। इसके बावजूद, यहाँ तैनात शिक्षक—गणेश दत्त मिश्र, सच्चिदानन्द त्रिपाठी, पौहारीशरण त्रिपाठी, करूणापति और गोपाल मिश्र—जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय के कर्मचारियों के साथ सांठगांठ कर वर्षों से सरकारी वेतन आहरित कर रहे थे।
शिकायतकर्ता अवधबिहारी तिवारी द्वारा धारा 156(3) के तहत दी गई अर्जी पर हुई जाँच में पाया गया कि इस धोखाधड़ी से सरकार को अब तक करोड़ों रुपये की वित्तीय क्षति पहुँचाई जा चुकी है।
हैरान करने वाला तथ्य: नियुक्ति से पहले ही निकाल लिया लोन
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| खंड शिक्षा अधिकारी के साथ आरोपी करुणापति और परिवार के अध्यापक |
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| सत्ता का प्रभाव |
इस घोटाले की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक आरोपी शिक्षक (करूणापति) पर अपनी नियुक्ति तिथि से पहले ही जी.पी.एफ. (GPF) खाते से लोन लेने का गंभीर आरोप है। यह तथ्य विभाग और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है।
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| जिला विद्यालय निरीक्षक और आरोपी करुणापति |
न्यायालय की तल्ख टिप्पणी: "अपराध की प्रकृति गंभीर"
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि नियुक्तियां नियमानुसार हुई हैं और पुलिस ने केवल अटकलों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे एक संगठित वित्तीय अपराध बताया।
सत्र न्यायाधीश ने जमानत खारिज करते हुए मुख्य आधार बताए:
गंभीर धाराएं: आरोपियों पर IPC की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा अमानत में खयानत) और 467 (जालसाजी) जैसी गंभीर धाराएं लगी हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
चार्जशीट दाखिल: विवेचना पूर्ण हो चुकी है और पुलिस ने ठोस साक्ष्यों के साथ चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है।
प्रथम दृष्टया संलिप्तता: उपलब्ध रिकॉर्ड्स के आधार पर आरोपियों की अपराध में सीधी संलिप्तता नजर आती है।
अब क्या होगा आगे?
न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत याचिका (संख्या 114/2026, 115/2026 और 113/2026) खारिज होने के बाद अब आरोपी शिक्षकों—सच्चिदानन्द त्रिपाठी, पौहारीशरण त्रिपाठी और गणेश दत्त मिश्र—पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। 4 फरवरी 2026 को आए इस आदेश ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
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