वाराणसी: अवैध गैस रिफिलिंग – मौत का कारोबार और प्रशासनिक चुप्पी
क्यूँ फल-फूल रहा है यह धंधा?
आर्थिक लाभ: घरेलू गैस (सब्सिडी वाली) को छोटे सिलेंडरों में भरकर ऊंचे दामों पर बेचना मुनाफाखोरी का जरिया है।स्ट्रीट वेंडर्स की मांग: चाय की दुकानों, चाट ठेलों और छोटे होटलों में छोटे सिलेंडरों की भारी मांग रहती है। चेकिंग का अभाव: रिहायशी इलाकों के बंद कमरों में यह काम होता है, जहाँ सामान्यतः पुलिस या पूर्ति विभाग की नजर नहीं जाती।मिलीभगत के आरोप: स्थानीय लोगों का अक्सर आरोप रहता है कि पुलिस और खाद्य विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों की जानकारी में यह सब "सुविधा शुल्क" के बदले चलता है।
जब लापरवाही ने ली जान
वाराणसी में पिछले कुछ वर्षों में कई दर्दनाक हादसे हुए हैं:
2025 कैंटोनमेंट छावनी में दूकान मे रक्खी और प्रयोग हो रही सिलेंडर ब्लास्ट हुआ, आदमपुर (जनवरी 2024): कोयला बाजार में एक दुकान में रिफिलिंग के दौरान ब्लास्ट हुआ, जिसमें दो मासूम बच्चों की जलकर और दम घुटने से मौत हो गई। नदेसर (वरुणा अपार्टमेंट): मारुति वैन में गैस रिफिलिंग के दौरान भीषण धमाका हुआ। गनीमत रही कि स्कूली बच्चे वैन में नहीं थे, वरना बड़ी त्रासदी हो सकती थी। मंडुवाडीह और शिवपुर: इन क्षेत्रों में भी अवैध रिफिलिंग के दौरान आग लगने की छिटपुट घटनाएं होती रही हैं, जिनमें संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।
कार्यवाही का सच
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अक्सर सवाल उठते हैं:
रूटीन चेकिंग का अभाव: प्रशासन केवल किसी हादसे के बाद या मुखबिर की सटीक सूचना पर ही जागता है। नियमित रूप से घनी बस्तियों में सघन तलाशी अभियान नहीं चलाया जाता।छापेमारी और खानापूर्ति: हाल ही में (मार्च 2025/फरवरी 2026) शिवपुर और नैपुरा गेट के पास छापेमारी की गई। पुलिस ने सिलेंडर बरामद किए, लेकिन अक्सर मुख्य आरोपी मौके से फरार हो जाते हैं। ढीली कानूनी कार्रवाई: पकड़े गए आरोपियों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत कार्रवाई तो होती है, लेकिन ठोस पैरवी के अभाव में वे जल्द ही फिर से इसी धंधे में लग जाते हैं।
मंडराता खतरा
अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया, तो परिणाम भयानक हो सकते हैं:
भीषण अग्निकांड: वाराणसी की तंग गलियों में एक सिलेंडर ब्लास्ट पूरी बस्ती को राख कर सकता है। पर्यावरण और स्वास्थ्य: अवैध रिफिलिंग के दौरान गैस रिसाव से हवा जहरीली होती है और सांस की बीमारियां बढ़ती हैं।उपभोक्ताओं की लूट: घरेलू सिलेंडरों से चोरी कर रिफिलिंग करने से आम ग्राहकों को कम वजन की गैस मिलती है।
अचूक रणनीति का वाराणसी प्रशासन को सन्देश
"हादसे के बाद जागने" की नीति छोड़कर एक स्थायी टास्क फोर्स बनाने की जरूरत है, जो वार्ड स्तर पर अवैध गैस भंडारण की निगरानी कर सके।
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