अवैध हॉस्टलों के जाल में फंसी 'शिक्षा की नगरी': न फायर एनओसी, न सुरक्षा मानक; क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?

वाराणसी: रिहायशी इलाकों में 'मौत' के अवैध हॉस्टल, लंका से दुर्गाकुंड तक मानकों की बलि; क्या प्रशासन को है किसी बड़े हादसे का इंतजार? 

वाराणसी | विशेष रिपोर्ट: त्रिपुरेश्वर त्रिपाठी

धर्म और शिक्षा की नगरी काशी के गली-मोहल्लों में कुकुरमुत्ते की तरह अवैध हॉस्टल उग आए हैं। मकान मालिक अधिक मुनाफे के लालच में आवासीय (Residential) नक्शे पर बने घरों को व्यावसायिक (Commercial) रूप दे रहे हैं। काशी की गलियों में अब सिर्फ मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि कमर्शियल लालच का शोर सुनाई देता है।

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 शहर के प्रमुख छात्र इलाकों—लंका, दुर्गाकुंड, भेलूपुर, कबीर नगर और खोजवां—में हजारों की संख्या में अवैध हॉस्टल और पीजी (PG) संचालित हो रहे हैं। मजे की बात यह है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के रिकॉर्ड में ये आज भी "आवासीय मकान" हैं, लेकिन इनके कमरों में छात्र ठूंस-ठूंस कर भरे गए हैं।

प्रमुख हॉटस्पॉट: जहाँ नियमों की धज्जियाँ उड़ रही हैं

लंका और साकेत नगर: BHU के पास होने के कारण यहाँ सबसे ज्यादा दबाव है। संकरी गलियों में 4-4 मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, जहाँ एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ी घुसना नामुमकिन है।

दुर्गाकुंड और कबीर नगर: कोचिंग हब होने के नाते यहाँ के हर दूसरे घर में अवैध हॉस्टल है। न पार्किंग की जगह है और न ही वेंटिलेशन का इंतजाम।

भेलूपुर और शिवाला: यहाँ के पुराने रिहायशी घरों को बिना किसी तकनीकी जांच के हॉस्टल में बदला जा रहा है।

हालिया घटनाएँ: जब दांव पर लगी जिंदगी

अवैध हॉस्टलों और असुरक्षित परिसरों का परिणाम शहर हाल के दिनों में देख चुका है:

भेलूपुर संदिग्ध मौत (फरवरी 2025): भेलूपुर के एक निजी हॉस्टल में बिहार की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने हॉस्टल मालिक पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे अवैध रूप से चल रहे इन ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई।

लक्ष्मी गेस्ट हाउस छापा (जनवरी 2026): त्रिदेव मंदिर के पास एक गेस्ट हाउस में चल रहे अवैध देह व्यापार के भंडाफोड़ ने यह साबित कर दिया कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों की आड़ में अनैतिक कार्य भी पनप रहे हैं।

                    क्या हैं मानक और नियम?

किसी भी आवासीय क्षेत्र में हॉस्टल या लॉज चलाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान हैं:

लैंड यूज चेंज: आवासीय भवन को व्यावसायिक गतिविधि के लिए प्रयोग करने से पहले वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) से लैंड यूज बदलवाना अनिवार्य है।

भवन उपविधि: हॉस्टल के लिए निर्धारित पार्किंग स्पेस, खुले स्थान और कमरों के आकार के स्पष्ट नियम हैं।फायर एनओसी (Fire NOC): व्यावसायिक श्रेणी में आने के कारण फायर ब्रिगेड विभाग से क्लीयरेंस लेना अनिवार्य है।

नगर निगम पंजीकरण: सराय एक्ट या स्थानीय नगर निगम के तहत व्यावसायिक कर (Commercial Tax) का भुगतान और पंजीकरण जरूरी है।

                      कदम,जिम्मेदारी,क्रियान्वयन

डिजिटल मैपिंग,प्रशासन,शहर के हर गली-मोहल्ले में चल रहे हॉस्टलों का सर्वे कर डिजिटल डेटाबेस तैयार हो।

अनिवार्य फायर ऑडिट,अग्निशमन विभाग,हर 6 महीने में हॉस्टलों की औचक जांच और मानकों की कमी पर तत्काल सीलिंग।

हेल्पलाइन नंबर,पुलिस/नगर निगम,छात्रों और स्थानीय लोगों के लिए शिकायत पोर्टल जहाँ वे अवैध/असुरक्षित हॉस्टल की सूचना दे सकें।

पेरेंट अवेयरनेस,अभिभावक,केवल कम किराया न देखें; हॉस्टल का लाइसेंस और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूर मांगें।


प्रशासन की 'त्रिपुंड' रणनीति: सुरक्षा के तीन अचूक अस्त्र हमारे विश्लेषण के अनुसार, यदि प्रशासन इन तीन बिंदुओं पर काम करे, तो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है:

स्ट्रिक्ट ऑडिट और सीलिंग (VDA & Fire Dept)

केवल नोटिस देना काफी नहीं है। वाराणसी विकास प्राधिकरण को एक विशेष टास्क फोर्स बनानी चाहिए जो मौके पर जाकर 'बिल्डिंग यूज' की जांच करे। यदि रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल हॉस्टल चल रहा है, तो उसे तत्काल सील किया जाए। अग्नि सुरक्षा मानकों (Fire Safety) का अभाव होने पर मालिक पर भारी जुर्माना और कानूनी केस दर्ज हो।

डिजिटल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य (Police & Municipal Corp)

हर हॉस्टल संचालक के लिए 'स्मार्ट सिटी पोर्टल' पर पंजीकरण अनिवार्य हो। इसमें छात्रों का पुलिस वेरिफिकेशन और मकान का कमर्शियल टैक्स रिकॉर्ड लिंक होना चाहिए। बिना QR कोड वाले हॉस्टलों को 'अवैध' घोषित कर खाली कराया जाए।

                     पब्लिक पार्टनरशिप और हेल्पलाइन

स्थानीय मोहल्ला समितियों को सक्रिय किया जाए। यदि किसी आवासीय गली में क्षमता से अधिक छात्रों को रखा जा रहा है या नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो लोग सीधे डीएम या नगर आयुक्त के विशेष नंबर पर शिकायत कर सकें।

 "वाराणसी को हम केवल कागजों पर स्मार्ट नहीं बना सकते। जब तक लंका और दुर्गाकुंड की संकरी गलियों में चल रहे ये 'मौत के हॉस्टल' बंद नहीं होंगे, तब तक शहर के भविष्य (छात्रों) पर खतरा मंडराता रहेगा। प्रशासन को अब बुलडोजर सिर्फ सड़कों पर नहीं, नियमों को रौंदने वाले रसूखदारों के अवैध हॉस्टलों पर भी चलाना होगा।"

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