कल एक मित्र-शुभचिंतक का फोन आया। वह बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कारोबारी हैं। उन्हें सलाह की अपेक्षा थी। दरअसल मैं साइबर अपराध का शोधार्थी हूँ
और अध्ययन-अनुभव के आधार पर गाहे-बगाहे इस विषय पर लिखता रहता हूँ। वह एक कथित अमेरिकन कंपनी के बारे में जानकारी चाह रहे थे, जो डॉलर में निवेश कराती है और मात्र पचपन दिन के भीतर निवेश की गई रकम को दोगुना करने का दावा करती है। कई लोग छोटे-छोटे निवेश करके लाभ पाने की बात भी कह रहे थे।
मैंने उन्हें साफ शब्दों में समझाया कि यह सरासर ठगी का एक तरीका है। अगर कोई कंपनी मात्र दो महीने के भीतर आपकी जमापूंजी दोगुनी करने का वादा कर रही है, तो समझ लीजिए कि यह एक सोची-समझी योजना है। पहले आपको छोटे-छोटे निवेश पर लाभ दिया जाएगा, आप दूसरों को जोड़ेंगे, लाभ के किस्से सुनाए जाएंगे और जैसे-जैसे लोग जुड़ते जाएंगे, वैसे-वैसे रकम बढ़ती जाएगी। इसके बाद, जब बड़ी संख्या में लोग जुड़ जाएंगे और मोटी रकम इकट्ठा हो जाएगी, तो वे सब गधे के सींग की तरह गायब हो जाएंगे।
इसी तरह का एक मामला पंजाब के पूर्व आईजी से जुड़ा है, जिनसे लगभग आठ करोड़ दस लाख रुपये की ठगी हुई थी। मानसिक दबाव में आकर उन्होंने आत्महत्या की कोशिश तक कर ली थी। साइबर ठगों ने उन्हें ऑनलाइन निवेश और हाई रिटर्न का लालच देकर ठगा था।
एक अन्य मामले में एक बड़े व्यापारी के पास एक लड़की का फोन आता है। वह कहती है सर, आप प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं, हमारी कंपनी भी निवेश करके मोटा लाभ कमाती है, आप भी जुड़ जाइए। सेल्स और मार्केटिंग में यह कड़वी सच्चाई है कि वाकपटु लड़कियाँ लोगों को जल्दी प्रभावित कर लेती हैं। वही हुआ। व्यापारी ने हामी भरी तो उस लड़की ने उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया, जहाँ हर कोई अपने निवेश और मुनाफे की तस्वीरें और आंकड़े साझा कर रहा था। दरअसल यह पूरा खेल छोटा निवेश, मोटा मुनाफा के सुनियोजित प्लान पर आधारित था।
कुछ दिनों बाद लड़की ने कहा सर, सब कमा रहे हैं, मेरे कहने पर मात्र पचास हजार रुपये लगाइए। मुनाफा न हुआ तो कहियेगा। व्यापारी करोड़ों के मालिक थे, उन्होंने सोचा पचास हजार ही तो है, लगाकर देख लेते हैं औऱ रकम लगा दी। हैरानी की बात यह कि मात्र तीन दिन में उस ऐप पर पचास हजार रुपये नौ लाख रुपये दिखने लगे। उन्होंने लड़की को फोन किया और पूछा कि क्या यह रकम निकाली जा सकती है। जवाब मिला मर्जी आपकी है सर, प्रॉफिट आपका है। उन्होंने नौ लाख रुपये निकाल भी लिए और यहीं से आंखों पर लालच की पट्टी बंध गई।
इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने लगभग बारह करोड़ रुपये निवेश कर दिया। जब रकम निकालने की बात आती, तो यह कहकर रोक दिया जाता कि अभी और बढ़ेगा। एक दिन उस लड़की ने कहा सर, सत्रह करोड़ का एक निवेश है, यह कर दीजिए। महीने भर में इतना पैसा बन जाएगा कि आपकी तीन पुश्तें मालामाल हो जाएँगी। तब व्यापारी का माथा ठनका। बारह करोड़ रुपये पहले ही फँसे हुए थे और अब सत्रह करोड़ की मांग की जा रही थी। जैसे ही उन्होंने जांच-पड़ताल शुरू की, तब तक सारे नंबर, ग्रुप और ऐप बंद हो चुके थे। वे ठगे जा चुके थे।
दरअसल देश ही नहीं, विदेशों से खासतौर पर म्यांमार, कंबोडिया जैसे देशों से साइबर अपराधी सक्रिय हैं। यह लोग डर, लोभ और लालच दिखाकर जनता की जमा पूंजी लूटने के लिए हर दिन नए-नए तरीके आजमा रहे हैं। जो इनके जाल में फँसा, वह लुटे कारवां का मुसाफिर बन जाता है।
सोचिए, अगर वाकई पचपन दिन में धन दोगुना हो सकता, तो क्या देश की प्रतिष्ठित बैंकिंग और वित्तीय कंपनियाँ ऐसे निवेश मॉडल पर काम नहीं करतीं और जो व्यक्ति या कंपनी इतनी आसानी से पैसा दोगुना कर सकती है, वह आपको क्यों जोड़ेगी अपने ही पैसे को क्यों न बढ़ाती रहेगी।
ध्यान रखिए, ऐसी कई ठग कंपनियाँ चुपचाप बाजार में आती हैं, चेन सिस्टम बनाती हैं, तात्कालिक लाभ देती हैं और जैसे ही उनके पास पैसों का ढेर लगता है, वे फुर्र हो जाती हैं।
विनय मौर्या
बनारस।
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