स्मार्ट सिटी का 'अंधेरा' सच: कबीर नगर की बुझी लाइटें खोल रही हैं विकास की पोल!

 प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में 'दिये तले अंधेरा', शोपीस बनीं कबीर नगर की स्ट्रीट लाइटें

वाराणसी | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी को 'स्मार्ट सिटी' बनाने के दावे तो बहुत हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वाराणसी का कबीर नगर और दुर्गाकुंड इलाका, जो पूर्वांचल सहित बिहार, सोनभद्र, चकिया और भदोही के हजारों छात्रों के भविष्य की नींव रखता है, आज खुद अंधेरे में डूबा हुआ है।






लाखों के संसाधन, रख-रखाव का अभाव

हैरानी की बात यह है कि कबीर नगर की सड़कों पर बड़ी-बड़ी स्ट्रीट लाइटें और सोलर पैनल तो लगे हैं, लेकिन वे सिर्फ 'शोपीस' बनकर रह गए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नई स्ट्रीट लाइटें लगने के कुछ ही महीनों के भीतर खराब हो गईं और सोलर लाइटें तो कभी जलती ही नहीं। शासन ने संसाधन तो झोंक दिए, लेकिन रख-रखाव (Maintenance) के अभाव में सरकारी पैसा पानी में बह रहा है।










छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

दुर्गाकुंड-कबीर नगर मार्ग काशी के प्रमुख मोहल्लों को जोड़ने वाली मुख्य धमनी है। यहाँ रहने वाले और पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का कहना है कि रात के समय सड़कों पर पसरा अंधेरा न केवल दुर्घटनाओं को न्योता देता है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक है। सवाल यह है कि यदि देश के सबसे वीवीआईपी संसदीय क्षेत्र में ही लाइटें नहीं जलेंगी, तो रात्रि में बेटियों और छात्रों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

नगर निगम की 'कुंभकर्णी नींद' और पार्षदों की बेरुखी

क्षेत्र की जनता का आरोप है कि नगर निगम वाराणसी गहरी नींद में सोया हुआ है। अधिकारियों के तबादले होते रहते हैं, लेकिन काम करने का ढर्रा वही पुराना है। स्थानीय पार्षद की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब समस्या लेकर पार्षद के पास जाते हैं, तो एक रटा-रटाया जवाब मिलता है— "यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।"


 "पार्षद महोदय को शायद लगता है कि चरित्र या मृत्यु प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर कर देना ही उनकी एकमात्र उपलब्धि है। वे भूल गए हैं कि वे जनता और निगम के बीच के सेतु हैं, न कि सिर्फ एक रबर स्टैम्प।" — स्थानीय आक्रोशित नागरिक

प्रशासन से सीधे सवाल:

 करोड़ों के टेंडर के बाद भी लाइटें कुछ महीनों में क्यों खराब हो जाती हैं?

 क्या कबीर नगर जैसे 'एजुकेशन हब' की सुरक्षा प्राथमिकता में नहीं है?

नगर आयुक्त और संबंधित अधिकारी इस लापरवाही पर चुप्पी कब तोड़ेंगे? 


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