मूक-बधिर बच्चा 50 घंटे तक साइकिल चलाकर दूसरे जिले पहुँच सकता है? वाराणसी पुलिस ने कर दिखाया करिश्मा!
वाराणसी: कल्पना कीजिए उस पिता के दर्द की, जिसका 15 साल का मासूम बेटा न बोल सकता हो और न सुन सकता हो, ऊपर से वह 'डाउन सिंड्रोम' जैसी गंभीर स्थिति से जूझ रहा हो। 24 जनवरी को राजेन्द्र मगर (सूबेदार मेजर, 39 GTC) का बेटा आयुष घर्ती मगर अचानक घर से लापता हो गया।
50 घंटों का वो खौफनाक इंतजार और खाकी का जुनून: जैसे ही कैंट पुलिस को सूचना मिली, हड़कंप मच गया। कैंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा के निर्देशन में चौकी प्रभारी फुलवरिया दीक्षा पाण्डेय ने मोर्चा संभाला। चुनौती बड़ी थी—बच्चा अपनी बात बता नहीं सकता था। लेकिन वाराणसी पुलिस के इरादे चट्टान जैसे थे।
साइकिल, सीसीटीवी और मिर्जापुर का वो कोना: सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया, आरटी सेट गूंजने लगे। कड़ियाँ जुड़ती गईं और पता चला कि मासूम आयुष अपनी साइकिल से पैडल मारते-मारते वाराणसी की सरहदें लांघकर मिर्जापुर के कछवा बाजार तक जा पहुँचा था।
खुशखबरी जो आँखों में आँसू ले आई: महज 50 घंटों के भीतर पुलिस ने आयुष को सकुशल बरामद कर लिया।
जब बच्चा अपने माता-पिता से मिला, तो पूरे 39 GTC परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों ने हाथ जोड़कर वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस का आभार जताया।
वाराणसी पुलिस की मुस्तैदी ने साबित कर दिया कि अगर इरादे नेक हों, तो हर गुमशुदा को उसका (घर) मिल सकता है।
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