क्या आप जानते हैं? आपदा के समय 'देवदूत' बनने का हुनर सिखा रही है NDRF; दशाश्वमेध घाट पर दिखी अद्भुत झलक"

 NDRF ने सिखाया आपदा से बचने का हुनर; दशाश्वमेध घाट पर उमड़ा जनसैलाब, सीखे जीवन रक्षा के गुर



वाराणसी। एनडीआरएफ वाराणसी द्वारा दशाश्वमेध घाट पर आयोजित सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय को 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' बनने की ट्रेनिंग दी गई। कार्यक्रम के दौरान उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी हादसे में सबसे पहले स्थानीय लोग ही मौके पर होते हैं, इसलिए उन्हें आपातकालीन तकनीकों का ज्ञान होना अनिवार्य है।



आपातकालीन तकनीकों का ज्ञान होना अनिवार्य है।

वाराणसी। जन जागरूकता को ही सर्वोत्तम बचाव मानते हुए एनडीआरएफ ने दशाश्वमेध घाट पर आपदा प्रबंधन कौशल का प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को इतना सशक्त बनाना है कि दुर्घटना के समय जान-माल की हानि को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।


कार्यक्रम की मुख्य बातें:

 प्रशिक्षण: आम जनता को दुर्घटना के समय काम आने वाली विभिन्न जीवन रक्षक पद्धतियों के बारे में बताया गया।

  स्थानीय प्रतिक्रिया: आपदा की स्थिति में सबसे पहले सक्रिय होने वाले स्थानीय समुदाय की क्षमता को बढ़ाने पर जोर।

  वर्षभर की सक्रियता: एनडीआरएफ केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि  मॉक ड्रिल के जरिए समाज को तैयार करने का काम भी करती है।

एनडीआरएफ के जवानों ने लाइव डेमो के जरिए दिखाया कि डूबते हुए व्यक्ति को बचाने या आग जैसी आपात स्थिति में किस तरह के कौशल का प्रयोग करना चाहिए।

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