मानकों को ताक पर रखकर चल रहे होटल-हॉस्पिटल-स्कूल बिल्डिंगें
एनओसी के खेल में होती है मोटी कमाई
विनय मौर्या
वाराणसी। धर्म, आध्यात्म और पर्यटन की नगरी काशी आज फायर विभाग की मिलीभगत और घोर लापरवाही के चलते बारूद के ढेर पर बैठी दिखाई दे रही है। जिले में अधिकांश होटल, हॉस्पिटल, गेस्ट हाउस और स्कूल अग्निशमन विभाग के नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि यह सब विभागीय कर्मियों और अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है, जहां सुरक्षा नहीं, बल्कि मोटी कमाई प्राथमिकता बन चुकी है।
सूत्रों के अनुसार कई भवन बिना अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के ही धड़ल्ले से चल रहे हैं, जबकि कई ऐसे भवन जिन्हें मानकों के अनुसार एनओसी मिल ही नहीं सकती, उन्हें “सेटिंग” के जरिए प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। बदले में कर्मियों से लेकर अधिकारियों तक मोटा चढ़ावा चढ़ता है। यही वजह है कि एनओसी का यह खेल विभाग के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है।
नियम कागजों में, हकीकत में शून्य-
अग्निशमन नियमों के अनुसार हर बहुमंजिला भवन, होटल, हॉस्पिटल और शैक्षणिक संस्थान में फायर अलार्म सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, फायर ड्रिल और प्रशिक्षित स्टाफ अनिवार्य है। इसके साथ ही हर वर्ष एनओसी का नवीनीकरण और निरीक्षण जरूरी होता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश इमारतों में ये इंतजाम या तो अधूरे हैं या सिर्फ कागजों में मौजूद हैं।
सबक लेने को तैयार नहीं विभाग-
देश के विभिन्न हिस्सों में हुए भीषण अग्निकांडों के बावजूद वाराणसी का अग्निशमन विभाग कोई सबक लेता नजर नहीं आ रहा। धार्मिक, आध्यात्मिक और वीवीआईपी जिला कहे जाने वाले इस शहर में शासन और प्रशासनिक अधिकारियों की निगाहें भी इस गंभीर खतरे पर नहीं जा रही हैं, मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा हो।
सवाल यह है कि यदि किसी दिन कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा फायर विभाग, प्रशासन या फिर वही सिस्टम जो आज आंखें मूंदे बैठा है।
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