​अस्सी का अस्तित्व या नाले का कलंक? – क्या क्योटो के 'कामो' मॉडल से बदलेगी काशी की सूरत?

 वाराणसी की पहचान जिन दो नदियों—'वरुणा' और 'अस्सी'—से मिलकर बनी है, 


उनमें से 'अस्सी' आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। दशकों से यह बहस जारी है कि क्या अस्सी अब भी एक नदी है या महज एक गंदा नाला बनकर रह गई है।

 अस्तित्व का जंग लड़ती अस्सी नदी

ऐतिहासिक गौरव बनाम वर्तमान त्रासदी

पौराणिक मान्यताओं और 'काशी खंड' के अनुसार, अस्सी एक पवित्र नदी है जो जगन्नाथ मंदिर के समीप से बहते हुए गंगा में मिलती है। इसी के संगम पर विश्व प्रसिद्ध अस्सी घाट स्थित है। लेकिन आज ज़मीनी हकीकत यह है कि यह नदी कचरे, सीवर और अतिक्रमण के जाल में फंसकर एक 'नदी' कम और 'गंदा नाला' अधिक नज़र आती है।

                   नदी से नाला बनने के मुख्य कारण

अस्सी के "नाला" कहलाने के पीछे कोई प्राकृतिक कारण नहीं, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप है:

 अतिक्रमण: नदी के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment area) पर अवैध निर्माण ने इसकी चौड़ाई को सिकोड़ दिया है।

 सीवर का गिरना: शहर के दर्जनों बड़े और सैकड़ों छोटे नाले बिना ट्रीटमेंट के सीधे अस्सी में गिरते हैं।

 उद्गम स्थल का सूखना: कंदवा (करदमेश्वर) के पास स्थित इसके मूल जल स्रोत अब लगभग विलुप्त हो चुके हैं।

 प्रदूषण: प्लास्टिक और ठोस कचरे ने नदी की धारा को बाधित कर दिया है।अस्सी नदी के प्रवाह क्षेत्र और इसके 50 मीटर के बफर जोन में पिछले तीन दशकों में बड़े पैमाने पर निर्माण हुए हैं। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) और सिंचाई विभाग के हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 600 से अधिक संरचनाएं ऐसी हैं जो नदी के जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) या उसके किनारों पर अवैध रूप से बनी पाई गई हैं।

यहाँ उन प्रमुख श्रेणियों और क्षेत्रों की सूची दी गई है जहाँ बड़े विद्यालय, अस्पताल और इमारतें इस दायरे में आती हैं: 

                प्रमुख विद्यालय और कोचिंग संस्थान

नदी के उद्गम स्थल (कंदवा) से लेकर लंका-नरिया बेल्ट तक कई निजी स्कूल और हॉस्टल बने हैं:

 चितईपुर और करमनवीर क्षेत्र: यहाँ कई निजी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय नदी के पुराने बहाव क्षेत्र में स्थित हैं।

 नरिया और साकेत नगर: यहाँ दर्जनों निजी गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल्स की बड़ी इमारतें हैं जो नदी के बिल्कुल किनारे (बफर जोन) में बनी हैं।

 कोचिंग सेंटर्स: लंका और दुर्गाकुंड की ओर जाने वाले मार्ग पर कई व्यावसायिक इमारतें हैं जिनमें बड़ी कोचिंग क्लासेस चलती हैं।

                     अस्पताल और नर्सिंग होम

वाराणसी का यह हिस्सा चिकित्सा का केंद्र है, इसलिए यहाँ कई बड़े क्लीनिक और अस्पताल नदी के करीब हैं:

 लंका-भैदनी मार्ग: इस क्षेत्र में स्थित कुछ पुराने और नए नर्सिंग होम अस्सी नदी के 'निकास' और 'बहाव' क्षेत्र को प्रभावित करते हैं।

 सुंदरपुर और नरिया: यहाँ कई बहुमंजिला निजी अस्पताल बने हैं जिनकी सीवर लाइनें पूर्व में सीधे नदी से जुड़ी पाई गई थीं।

                  बड़ी इमारतें और अपार्टमेंट्स 

सबसे अधिक अतिक्रमण बहुमंजिला इमारतों के रूप में देखा गया है:

साकेत नगर: यहाँ कई वीआईपी और मध्यम वर्गीय आवासीय कॉलोनियां और ऊंचे अपार्टमेंट्स हैं जो 50 मीटर की सीमा का उल्लंघन करते हैं।

 रवींद्रपुरी एक्सटेंशन: इस पॉश इलाके की कुछ इमारतों के पिछले हिस्से अस्सी नदी के डूब क्षेत्र में आते हैं।

करमजीतपुर और कंदवा: यहाँ कई बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां (Group Housing) विकसित हो गई हैं, जिन्हें अब लाल निशान के दायरे में रखा गया है।

           VDA की कार्रवाई की वर्तमान स्थिति

चिन्हांकन  VDA ने लगभग 450 से 600 इमारतों पर लाल निशान लगाए हैं। इन भवनों के स्वामियों को 'अवैध निर्माण' और 'अतिक्रमण' के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।  वर्तमान में केवल उन निर्माणों को ढहाया जा रहा है जो नदी के मूल मार्ग (River Bed) के बीच में हैं। |

प्रमुख प्रभावित मोहल्ले जहाँ ये इमारतें स्थित हैं:

 कंदवा: (शुरुआती बिंदु, यहाँ कई स्कूल और नई कॉलोनियां हैं)। करमनवीर: (घनी आबादी वाला क्षेत्र, छोटे क्लीनिक और स्कूल)। सुंदरपुर: (व्यावसायिक परिसर और अस्पताल)।साकेत नगर/नरिया: (सबसे महंगे अपार्टमेंट्स और हॉस्टल्स)(NGT) के सख्त रुख के कारण अब इन क्षेत्रों में नए बिजली कनेक्शन और नक्शा पास होने पर पूरी तरह रोक है।


                            क्या है समुचित समाधान? 

सिर्फ नाम बदलने या कागजों पर इसे नदी घोषित करने से सुधार नहीं होगा। इसके लिए एक बहुविकल्पी योजना की आवश्यकता है:

सीवर टैपिंग  नदी में गिरने वाले हर छोटे-बड़े नाले को इंटरसेप्ट कर उसे 'सीवर ट्रीटमेंट प्लांट' (STP) तक पहुँचाना। |

अतिक्रमण हटाना  NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के निर्देशों के अनुसार नदी के किनारों को खाली कराकर वहां 'बफर जोन' बनाना। |

ड्रेजिंग और सफाई नदी की तलछट में जमा सालों पुराने कचरे और गाद को बाहर निकालना ताकि जल का प्राकृतिक प्रवाह बहाल हो सके। |

 रिवर फ्रंट विकास  वरुणा की तर्ज पर अस्सी के किनारों का सौंदर्यीकरण और वृक्षारोपण करना। |

जन भागीदारी  स्थानीय निवासियों को जागरूक करना ताकि वे कचरा नदी में न फेंकें। |

निष्कर्ष: नदी है या नाला?

कानूनी और भौगोलिक रूप से अस्सी एक नदी ही है, लेकिन इसकी वर्तमान स्थिति नाले जैसी हो गई है। इसे पुनर्जीवित करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि काशी के हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य की पीढ़ियां इसे केवल भूगोल की किताबों में एक 'विलुप्त जलधारा' के रूप में पढ़ेंगी। एक विचार: "नदी का पानी ही उसकी आत्मा है; अगर उसमें केवल सीवर बह रहा है, तो हम उसकी आत्मा का अपमान कर रहे हैं।"


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 * Government Rules: VDA Master Plan 2031 Varanasi, NGT guidelines for Assi River, 50 meter buffer zone rule.

 * Pollution: अस्सी नदी या गंदा नाला, Assi

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